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छोटे नालों की सफाई, बड़े नाले गंदगी से अटे, कैसे रुकेगा जलभराव

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छोटे नालों की सफाई, बड़े नाले गंदगी से अटे, कैसे रुकेगा जलभराव
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मेरठ। नगर निगम शहर के नालों की सफाई तो कर रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। इसके अलावा पहले बड़े नालों की सफाई होनी चाहिए थी, लेकिन नगर निगम छोटे नालों की सफाई में जुटा है। यानि मानसून तक नालों की सफाई किसी भी हाल में नहीं हो पाएगी और बड़े नाले चोक होने के कारण शहर में जलभराव होना तय है।
शहर के ओडियन नाला, आबू नाला प्रथम और आबू नाला द्वितीय बड़े नाले हैं। शहर के सभी छोटे नालों का पानी इनके जरिये ही काली नदी तक पहुंचता है। अभी तक एक भी बड़े नाले की 50 फीसदी सफाई भी पूरी नहीं हो पाई है। नगर निगम का अमला सिर्फ छोटे नालों की सफाई में जुटा है। ऐसे में बड़े नाले चोक होने से बरसात में इन छोटे नालों का पानी वापस लौट आएगा और जलभराव का सामना करना पड़ेगा।
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यह हैं बड़े नालों के हालात
ओडियन नाला
इस नाले में बागपत रोड, जैन नगर, घंटाघर, कोटला, ब्रह्मपुरी, लिसाड़ी रोड, लिसाड़ी गेट, जाकिर कॉलोनी, इस्लामनगर, शास्त्री नगर, जागृति विहार आदि क्षेत्रों से गुजर रहे छोटे नालों का गंदा पानी गिरता है। ओडियन नाला आर्मी क्षेत्र से होते हुए ईदगाह चौराहा, भूमिया का पुल, कांच का पुल, हापुड् रोड, पुराना कमेला, शास्त्रीनगर जागृति विहार होते हुए यह नाला काली नदी में गिरता है। हर साल ओडियान नाले के आसपास के इलाके जलभराव से जूझते हैं। लेकिन इसके बावजूद अभी तक ओडियान नाले की सफाई हापुड़ रोड स्थित पुराना कमेला पुलिया तक हो पाई है। जिस रफ्तार से सफाई चल रही है उसके मुताबिक मानसून से पहले पूरे नाले की सफाई संभव नहीं है। यानि नगर निगम की लापरवाही के कारण इस साल भी बरसात में जलभराव होना तय है।
आबू नाला प्रथम
यह नाला कंकरखेड़ा क्षेत्र के लाला मोहम्मद पुर से छावनी क्षेत्र, बेगमपुल, मोहनपुरी, फूलबाग कॉलोनी, मंगलपांडे नगर, शास्त्रीनगर, जागृति विहार से होते हुए काली नदी तक पहुंचता है। नगर निगम ने पिछले माह बेगमपुल से इस नाले की सफाई शुरू की थी। अभी तक मंगलपांडे नगर तक ही सफाई हो पाई है। यानि आधे से ज्यादा नाले की सफाई अभी बाकी है। यहां भी सफाई की रफ्तार बेहद धीमी है।
आबूनाला द्वितीय
पावली खास से रोशनपुर डौरली, कसेरूखेड़ा, गंगानगर, किला रोड से होते हुए काली नदी तक पहुंचने वाले इस नाले को आबू नाला द्वितीय नाम दिया गया है। इसमें रोशनपुर, डौरली, रुड़की रोड, मोदीपुरम, पल्लवपुरम, छावनी क्षेत्र, कसेरूखेड़ा और गंगानगर आदि क्षेत्रों की कॉलोनियों का गंदा पानी गिरता है। नाले की सफाई अभी तक कसेरूखेड़ा तक ही हुई है, एक बड़ा हिस्सा अभी भी गंदगी से अटा पड़ा है। ऐसे में इस नाले की जद में आने वाली कॉलोनियों में भी जलभराव तय है।
मिलती है ट्रेनिंग
ड्रेनेज की सफाई सदैव टेल की तरफ से वापस होती है। जब तक काली नदी को नालों से नीचा नहीं किया जाएगा तब तक शहर को जलभराव से मुक्ति नहीं मिलेगी। नगर निगम में नाला सफाई का कोई एक्सपर्ट अधिकारी नहीं है। लखनऊ नगर विकास विभाग में सभी नगर निगम नगर पालिका और नगर पंचायतों के अधिकारियों को नाला सफाई की ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन निगम अधिकारी उसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। - डॉ लक्ष्मीकांत वाजपेयी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा।
बीच-बीच में से नहीं हुई सफाई
प्रतिवर्ष नगर निगम की बोर्ड बैठक में नाला सफाई का मुद्दा उठाया जाता है। बागपत रोड पर शहर में सबसे अधिक जलभराव होता है। इस साल भी बीच-बीच में से छोड़कर नालों की सफाई की गई है, जिस कारण जलभराव से मुक्ति नहीं मिलेगी। - दीपिका गुप्ता, पार्षद वार्ड 51
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नालों की हो रही है सफाई उठ रही है सिल्ट
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गजेंद्र कुमार का कहना है कि महानगर के नालों की सफाई लगातार चल रही है। जहां तीनों बड़े नालों पर पोर्कलेन मशीन लगी हैं, वहीं नालों से निकाली गई सिल्ट को भी उठाया जा रहा है। इसके अलावा बागपत रोड, दिल्ली रोड, जिला अस्पताल रोड आदि नालों पर भी सफाई का कार्य चल रहा है।
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