कोरोना प्रभाव : पार्क में घूमने और प्राइवेट कॉलोनियों पर शुल्क की तैयारी
मेरठ। कोरोना काल में प्राधिकरणों और आवास विकास में भी आर्थिक दबाव शुरू हो गया है। जिन योजनाओं को कोरोना काल से पहले शुरू किया गया था उन्हें पूरा करने का खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित कर सुझाव मांगे थे। वहीं, प्रमुख सचिव आवास ने भी सभी विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों से बात की थी। अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद पार्क में घूमने, प्राइवेट कॉलोनियों पर शुल्क या सेस लगाने की तैयारी है।
लॉकडाउन में कई विभागों के सामने वेतन देने का संकट भी खड़ा होने लगा है। इस स्थिति से पार पाने के लिए नए सुझावों पर अमल कराने की तैयारी है। जिससे आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। इसमें प्राधिकरण और आवास-विकास की कॉलोनियों में रह रहे लोगों पर दबाव बढ़ सकता है।
अवैध निर्माण से खजाना भरने की योजना
मेरठ विकास प्राधिकरण में सबसे अधिक अवैध निर्माण के मामले सामने आते हैं। समिति ने इस विषय का समाधान कर खजाना भरने का विकल्प खोज निकाला है। शमन शुल्क लेकर अवैध निर्माणों को नियमित किया जाएगा। जिससे प्राधिकरण की आय के साथ आर्थिक दबाव भी कम होगा।
व्यावसायिक शुल्क से गतिविधियां शुरू करने की तैयारी
आम लोगों को व्यापार करने के उद्देश्य से राहत देने के लिए 30 से 45 मीटर रोड पर शुल्क लेकर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कराने की तैयारी की जा सकती हैं। इससे प्राधिकरण को शुल्क मिलेगा और आम आदमी को लाभ मिलेगा। वहीं, छोटे पार्कों का रखरखाव एनजीओ और बैंक को देने का सुझाव भी दिया गया।
पीपीपी मॉडल पर कम्यूनिटी सेंटर का संचालन
जिले में प्राधिकरण और आवास विकास की कॉलोनियों में कम्यूनिटी सेंटर मौजूद हैं। हाल ही में इनका उपयोग सामुदायिक किचन के रूप में किया गया। अब इन्हें पीपीपी मॉडल पर संचालित करने का सुझाव कमेटी ने भेजा है। इनमें शहर में होने वाले कार्यक्रमों के लिए बुकिंग करने पर आय में इजाफा हो सके।
एमडीए के यहां हैं कम्यूनिटी सेंटर
गंगानगर, पांडव नगर, डिफेंस एंक्लेव, पल्लवपुरम, वेदव्यासपुरी आदि स्थानों पर कम्यूनिटी सेंटर हैं।