. बाल लीलाओं, पूतना उद्धार और गोवर्धन धारण का हुआ भावपूर्ण वर्णन
...कथाओं के प्रसंगों पर झूमे श्रद्धालु, 56 भोग लगाकर की गई आरती
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
शहर में विभिन्न स्थानों पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, पूतना उद्धार, तृणावर्त वध और गोवर्धन धारण का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यासों ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए निष्कपट मन से प्रेम, भक्ति और पूर्ण विश्वास आवश्यक है।
श्री राम नवमी मंदिर डालमपाड़ा में कथा के पांचवें दिन देवभूमि उत्तराखंड से आए आचार्य प्रदीप नौटियाल ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन धारण का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की आयु में सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर धारण कर ब्रजवासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की। उन्होंने 56 भोग की कथा भी सुनाई। गोवर्धन लीला के भजन पर श्रद्धालु झूमकर नाचे। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित सीपी डिमरी, मयंक अग्रवाल, आशीष रस्तोगी, आकाशा अग्रवाल, वासु चौरसिया, प्रदीप शर्मा, सचिन गर्ग, राहुल बंसल, सत्यनारायण सिंघल, मनीष सिंघल, नितिन शंकर और मयंक चौरसिया रहे।
कंकरखेड़ा स्थित जगदीशपुरम पार्क में डॉ. रामप्रकाश शास्त्री ने कथा में भगवान शिव के कन्हैया के दर्शन करने गोकुल पहुंचने का प्रसंग सुनाया। इसके बाद पूतना उद्धार और अन्य बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा में पर्वत, वृक्ष, नदियों और गायों के प्रति कृतज्ञता का भाव निहित है। कथा में वृंदावन की होली का प्रसंग भी सुनाया गया। 56 भोग लगाकर आरती की गई। ऋषिपाल सिंह, सीमा वर्मा, शुभम चौधरी, प्रज्ञा चौधरी, कौशल्या पुंडीर, उमेश, देवकी नंदन और अमित शर्मा उपस्थित रहे।
जागृति विहार एक्सटेंशन स्थित सुमित्रा सत्संग भवन में वेदांत सत्संग समिति की कथा के छठे दिन महामंडलेश्वर स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ने पूतना उद्धार, शकट भंजन, तृणावर्त, अघासुर, बकासुर वध, माखन चोरी और गोवर्धन धारण की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान भक्तों के हृदय की चोरी करते हैं और दृढ़ प्रीति व विश्वास ही उत्तम भक्ति है। व्यास पूजन राजीव शर्मा व ममता शर्मा ने किया।
मीरा एनक्लेव में संजय रस्तोगी व नूतन रस्तोगी के निवास पर पंडित अंश वशिष्ठ ने पूतना मोक्ष, तृणावर्त उद्धार, नामकरण संस्कार और गोवर्धन लीला का वर्णन किया। कथा के दौरान भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। आयुष रस्तोगी, संजोली रस्तोगी, मनी रस्तोगी, शुभांकर, निशांत, अनिकेत, आचार्य कंवल नैन वशिष्ठ, ध्रुव वशिष्ठ और बिजेन्द्र सिंघल रहे।