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बाल दिवस 2022: नौनिहाल गढ़ रहे कामयाबी की नई इबारत, खेल-कूद की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहरा रहे परचम

Mon, 14 Nov 2022 02:47 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

दिल है छोटा सा, छोटी सी आशा, चांद तारों को छूने की आशा.....जी हां कुछ ऐसे ही हैं मेरठ के बच्चें, कभी पौधरोपण करके प्रधानमंत्री के मन को मोह लेते है, तो कभी खेल में पदक जीत के अपने देश का नाम रोशन कर रहे हैं। नौनिहालों की सफलता का परचम राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फहरा रहा है।
 
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मेरठ की ईहा दीक्षित - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मेरठ भले ही देह छोटी हो, उम्र कम हो, लेकिन उनके अरमान बड़े हैं। छोटे से दिल में आसमान छूने की आशा है। मेरठ के बच्चे अक्सर अपनी प्रतिभा से चौंकाते हैं। कभी वे शिक्षा में कोई मुकाम बना लेते हैं तो कभी खेल में। शहर के नौनिहालों की सफलता का परचम राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फहरा रहा है। शहर की गलियों से निकलकर बच्चे देशभर में मेरठ का नाम रोशन कर रहे हैं। 

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ईहा ने पाया राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 

सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार पाने वाली उत्तर प्रदेश की इकलौती बेटी ईहा दीक्षित को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पौधा देकर सम्मानित किया था। ईहा हर रविवार को ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण करती हैं और फिर अपने फोटो को फेसबुक पर अपलोड करती हैं। ईहा के इस काम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना होती है। ईहा ने घर के बगीचे में नीबू का पौधा लगाकर यह अभियान शुरू किया था। राष्ट्रपति से पुरस्कार पाने वाली ईहा ने मेरठ का नाम रोशन किया है। 

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खिलौनों से नहीं शतरंज की मंझी खिलाड़ी है निष्ठा - फोटो : amar ujala
खिलौनों से नहीं शतरंज की मंझी खिलाड़ी है निष्ठा 
जिस उम्र में बच्चे खिलौनों से खेलना सीखते हैं, उस उम्र में अगर वह शतरंज की चालों में मंझे खिलाड़ियों को उलझाने लगें तो कमाल की बात है। पांडवनगर निवासी विवेक त्यागी की बेटी निष्ठा में कुछ ऐसा ही हुनर है। विवेक त्यागी शतरंज कोचिंग सेंटर चलाते हैं।

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कोचिंग में खिलाड़ियों को शतरंज के गुर सिखाते समय निष्ठा पिता के साथ होती है। ऐसे में कम उम्र में ही वह शतरंज सीखने लगी। लगातार प्रैक्टिस से उसके खेल में निखार आ रहा है। उसने जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 
 
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अंतरराष्ट्रीय शटलर निशान परवीन - फोटो : amar ujala
अंतरराष्ट्रीय शटलर है निशान परवीन 
बोल सुन नही सकती, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और एक मुकाम हासिल किया। लिसाड़ी गेट क्षेत्र की रहने वाली निशा परवीन अंतरराष्ट्रीय शटलर खिलाड़ी है। मलेशिया में मूकबधिर इवेंट में उसने 2018 में कांस्य पदक जीता था। अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर छाई हुई है। इसने जिला स्तर, मंडल स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर भी कई पदक जीते हैं। 

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