सीएए के विरोध में विगत 20 दिसंबर के उपद्रव में मदरसों के बच्चों को कहीं फंसाया तो नहीं गया इसकी जांच करने के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम बुधवार को फिर से शहर में आई। टीम ने आर्य समाज रोड सादात हॉस्टल और मदरसे के छात्रों से बात कर उसके बयान दर्ज किए। तीन घंटे की जांच पड़ताल के बाद टीम दिल्ली लौट गई।
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान विगत 20 दिसंबर 2019 को शहर में जमकर बवाल हुआ था। पथराव में एडीजी प्रशांत कुमार सहित तीस पुलिस कर्मी घायल हुए थे। फायरिंग में एक युवक नूरा की मौत हुई थी तथा कई घायल हुए थे। आगजनी में दर्जनभर बाइक और वाहन फूंक दिए गए थे। तीन बैंक में आग लगाई गई थी। तब आरोप था कि बवाल में किशोर और बच्चे भी शामिल थे।
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पुलिस पर यह आरोप लगे थे कि पुलिस ने मदरसे के कुछ छात्रों को गलत नामजद कर दिया है। इसकी शिकायत के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग इसकी जांच कर रहा है। शनिवार को भी टीम ने शहर में आकर आगजनी स्थलों का निरीक्षण कर दुकानदारों और नागरिकों से पूछताछ की थी। बुधवार को भी आयोग की टीम शहर पहुंची और फिर से जांच पड़ताल की।
टीम में शामिल बाल अधिकार संरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ विशेष गुप्ता, सदस्य डॉ जया ने पहले एसपी सिटी सतपाल अंतिल, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार, एसडीएम सदर अशोक कुमार, सीओ सिटी हरीश भदौरिया, तहसीलदार पुष्करनाथ चौधरी से बैठक कर कई बिंदुओं पर वार्ता की जानकारी ली।
इसके बाद टीम ने आर्य समाज रोड स्थित सादात हास्टल और मदरसे के छात्रों से बात की। टीम ने घटना के रोज क्या हुआ और पुलिस उन्हें पकड़कर कहां ले गई थी और बाद में कब छोड़ा आदि बयान दर्ज किए। करीब तीन घंटे की जांच पड़ताल के बाद टीम दिल्ली लौट गई।