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भारतीय इतिहास के साथ धोखा हुआ : डॉ. पांडेय

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मेरठ के हस्तिनापुर ​स्थित जंबूद्वीप में अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना अंतर्गत कार्यक्रम में इ? - फोटो : MAWANA
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भारतीय इतिहास के साथ धोखा हुआ : डॉ. पांडेय
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हस्तिनापुर। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि भारतीय इतिहास के साथ धोखा किया गया है। दुनिया के इतिहास में भारत का नामोनिशान नहीं है।
विश्व स्तर पर भारत का इतिहास दूर-दूर तक नजर नहीं आता है। भारत का इतिहास अन्य देशों में जाकर उठाते हैं तो हमारे देश के सिद्धपुरुष एवं ऐतिहासिक तथ्य कहीं नजर नहीं आते हैं। इससे साफ है कि हमारे इतिहास को पूर्व में मुगलों और अंग्रेजों ने षड्यंत्र के तहत नष्ट किया है। पूर्व के इतिहास पर नजर डाली जाए तो मुगलों का इतिहास अकबरनामा बीरबल नामा आदि कई तथ्य देखने को मिलते हैं। हमारे ऐतिहासिक मंदिरों एवं गुरुद्वारों आदि को मुगल बादशाह अलाउद्दीन खिलजी, अकबर औरंगजेब आदि ने तुड़वा दिया था। इस कार्य में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना करने के लिए उनका साथ दिया। इतना ही नहीं हमारे महापुरुषों का अपमान भी किया। हस्तिनापुर, मथुरा, अयोध्या और काशी आदि का इतिहास विश्व इतिहास में अंकित नहीं है। हमारे शौर्य का इतिहास साजिश के तहत खत्म किया गया है। इसलिए अखिल भारतीय संकलन योजना इतिहास को खंगाल कर संजोने का कार्य कर रही है। भारतीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और अन्य तथ्यों को दुनिया के सामने लाने का काम इतिहासकारों द्वारा किया जा रहा है। आर्य बाहर से आए थे यह तथ्य बिल्कुल गलत है। हमारी कई पूजनीय नदियों का नाम बदला गया। जिनकी खोज अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के तहत की गई। वहीं, इतिहास में शहीद भगत सिंह को आतंकवादी बताया है। 1857 में क्रांति के असल तथ्यों को आज तक छुपाया गया।
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अयोध्या फैसले में इतिहासकारों की भूमिका अहम
अयोध्या प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से साफ हो गया कि यहां पर भगवान श्रीराम का मंदिर था। इसमें देश के इतिहासकारों का बड़ा योगदान रहा है। देश की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कहा था कि राम काल्पनिक हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्य को मानकर यह फैसला सुनाया। इतिहासकारों ने यह सिद्ध किया कि यहां पर अयोध्या थी और भगवान श्रीराम का जन्म भी यहीं हुआ था।
हस्तिनापुर का विकास अयोध्या की तर्ज पर हो
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना में इतिहासकारों ने हस्तिनापुर का इतिहास 11 तथ्य को संजोकर और खंगाल कर लिखा है। उसमें दर्शाया कि महल कहां और किसका था। किस तरह वहां का जीवन था। इन सभी तथ्यों को संकलित कर सरकार को इन्हें स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जाएगा। अयोध्या की तर्ज पर जल्द ही हस्तिनापुर का विकास कराने का प्रयास होगा।
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चर्चा के मुख्य बिंदू
हस्तिनापुर में संबंधित तथ्यों को खंगालकर प्रमाणिकता तय करना।
देश भर में इतिहास से संबंधित संगोष्ठियों का आयोजन।
देश भर में इतिहास का दर्शन कराना।
पुराणों में हस्तिनापुर के इतिहास से प्रमाण एकत्र करना।
हस्तिनापुर में कृषि व्यवस्था से संबंधित ऐतिहासिक प्रमाण जुटाना।
हस्तिनापुर से संबंधित तथ्य
कौरवों का महल, पांडवों का महल, द्रौपदी घाट, कामाख्या देवी मंदिर, पांडव टीला, कर्ण मंदिर।
ये शामिल हुए
कार्यक्रम में जयपुर से डॉ. रमेश चंद, उड़ीसा से डॉ. कमलेश दास, डॉ. ईश्वर शरण, प्रोफेसर कृष्ण स्वरूप गुप्त, शरद हेवाल, डॉ. बालमुकुंद पांडेय, मंगलदास डोगरा, उज्जैन से प्रोफेसर सुष्मिता पांडेय, हिमाचल से डॉ. सूरत ठाकुर, झारखंड से डॉ. राजकुमार, डॉ. मनीषा कुमारी, कोंकण से डॉ. हेमा टन्ना, काशी से प्रोफेसर सुमन जैन, असम से डॉ. हेमंत, कर्नाटक से डॉ. कोटरेप, जोधपुर से डॉ. मदन गोपाल व्यास, बिहार से डॉ. राजीव रंजन, कानपुर से डॉ. राजाराम व्यास आदि समेत अन्य शामिल हुए।
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