जिला कारागार अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा का कहना है कि चंद्रशेखर से सिर्फ उसके परिजन एवं उसका अधिवक्ता को ही निर्धारित समय में मुलाकात करने की अनुमति है। किसी राजनीतिक व्यक्ति को चंद्रशेखर से मुलाकात की अनुमति नहीं है। जिस कारण विधायक जिग्नेश मेवाणी को चंद्रशेखर से मिलने नहीं दिया गया।
अब यूपी और उत्तराखंड की राजनीति को गर्माने की तैयारी ?
दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पर हुई युवा हुंकार रैली एवं जनसभा में विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा था कि अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दलितों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। इस रैली के तुरंत बाद ही जिग्नेश मेवाणी सीधे सहारनपुर में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर से मुलाकात करने के लिए जेल पहुंच गए। मुलाकात न होने पर जेल प्रशासन से मुलाकात का समय मांग लिया। भीमा कोरेगांव में भी जिग्नेश मेवाणी ने 31 दिसंबर को बयान दिया था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पर लगे सारे केस हटा लिए, लेकिन चंद्रशेखर उर्फ रावण के ऊपर लगे झूठे केसों को हटाना भूल गए। उधर, जिग्नेश द्वारा दिल्ली में चंद्रशेखर का मुद्दा उठाए जाने और फिर सहारनपुर पहुंचने भीम आर्मी में भी उत्साह है। बताया जा रहा है कि भीम आर्मी ने चंद्रशेखर को रिहा कराने के लिए गुपचुप तरीके से आंदोलन की रणनीति भी बनानी शुरू कर दी है।
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