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तस्वीरें: छठे नवरात्र पर बड़ा आकार लेती है मां काली की मूर्ति, जानें 400 साल पुराने इस प्रसिद्ध मंदिर का इतिहास

Fri, 16 Apr 2021 04:54 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

मेरठ में सिद्धपीठ मां काली मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना है।
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मेरठ में सिद्धपीठ मंदिर - फोटो : amar ujala
मेरठ में सदर स्थित सिद्धपीठ मां काली मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना है। करीब 400 वर्ष पुराने मंदिर को लेकर मान्यता है कि छठे नवरात्र में मां काली की मूर्ति का आकार अन्य दिनों के मुकाबले बड़ा हो जाता है। मां का यह स्वरूप नवमी तक रहता है। सच्चे मन से जो मुराद मांगी जाती है, वह यहां पूरी होती है। प्रत्येक शनिवार को श्रद्धालु चुनरी, श्रृंगार का सामान, नारियल चढ़ाने और दीपक जलाने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में मनोकामना के लिए धागा बांधा जाता है।
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सिद्धपीठ मंदिर - फोटो : amar ujala
मंदिर के मुख्य पुजारी सोनकेत बैनर्जी ने बताया कि मान्यता है कि यहां पहले श्मशान था और लोग मन्नतें मांगते के लिए थे। धीरे धीरे यहां पूजा अर्चना होने लगी। बाद में यहां पर मां काली की मूर्ति की विधि विधान से पूजा आरंभ की और मंदिर की स्थापना की गई। 
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सिद्धपीठ मंदिर में पूजा-अर्चना करती महिला। - फोटो : amar ujala
कोई खाली हाथ नहीं लौटता
प्रत्येक शनिवार के अलावा नवरात्र में यहां श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। - ऋषि गुप्ता, श्रद्धालु

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सिद्धपीठ मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु। - फोटो : amar ujala
मां की पूजा-अर्चना से ही समस्या दूर हो जाती है। सदर बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोग मंदिर में दर्शन करने जरूर आते हैं। - गोल्डी, श्रद्धालु

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सिद्धपीठ मंदिर - फोटो : amar ujala
मंदिर में मिलती है मन की शांति
मां काली की पूजा से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं। देवी मंदिर में प्रवेश करते ही मन को शांति मिलती है। - वंशिका, श्रद्धालु

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