शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश ने व्यापारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। शनिवार को बाजार में आयोजित एक विशाल आम सभा में व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। व्यापारियों ने एकजुटता दिखाते हुए 21 और 22 फरवरी को संपूर्ण मेरठ बंद रखने का ऐलान किया। वहीं आम सभा में सेंट्रल मार्केट को अनिश्चितकालीन बंद करने ऐलान किया गया। इसके बाद दिनभर बाजार बंद रहा। देर शाम व्यापारी ऊर्जा राज्यमंत्री डाॅ. सोमेंद्र तोमर के आवास पर पहुंचे। मंत्री के आश्वासन के बाद व्यापारियों ने चार दिन के लिए अनिश्चितकालीन बंद टाल दिया।
शनिवार दोपहर हुई आमसभा में संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने भावुक होते हुए कहा कि व्यापार खोने वाला व्यक्ति दिन में सौ बार मरता है। उन्होंने जिम्मेदारों की बेरुखी पर अफसोस जताया और स्वर्गीय व्यापारी विनोद अरोड़ा को याद करते हुए कहा कि 2014 में व्यक्तिगत प्रयासों से ध्वस्तीकरण रोका गया था लेकिन दुर्भाग्यवश अब 661/6 को नहीं बचा पाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 21-22 के बंद को उनका पूर्ण सहयोग रहेगा। वरिष्ठ व्यापारी नेता अरुण वशिष्ठ ने अपनी उपेक्षा पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा पहले लोग उन्हें सुनते थे, अब हमें तो बुलाया तक नहीं गया, हम बिन बुलाए मेहमान हैं।
उन्होंने 661/6 के ध्वस्तीकरण को रोजी-रोटी पर प्रहार बताया और सरकार से इस मामले को सही तरीके से सुलझाने की अपील की। संचालन पूर्व पार्षद नरेंद्र राष्ट्रवादी ने किया। उन्होंने बताया कि ऊर्जा राज्यमंत्री से उनके आवास पर व्यापारी मिले। उन्होंने व्यापारियों को राहत का भरोसा दिलाते हुए चार दिन सेंट्रल मार्केट अनिश्चितकालीन बंद को टालने को कहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर व्यापारियों को भरोसा है। ऐसे में चार दिन के लिए यह फैसला टाल दिया गया है।
बैनर को लेकर तीखी नोकझोंक
आम सभा में जुटे व्यापारियों का कहना है कि सेंट्रल मार्केट में उपयोग परिवर्तन किया गया है जबकि ऐसे में सेंट्रल मार्केट में ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। इस दौरान सभास्थल पर लगे कुछ बैनरों ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। बैनरों पर लिखा था-मोदी जी जवाब दें, क्या व्यापारी देश छोड़ दें? गलती सिस्टम की, सजा व्यक्ति को क्यों? इस पर कुछ व्यापारी नेता उखड़ गए और उन्हें हटाने की मांग की जिससे काफी देर तक बहस होती रही। व्यापारियों ने मांग की है कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री के मेरठ आगमन पर उन्हें मिलने का समय दिया जाए। आमसभा में फैसला लिया गया कि 21 और 22 फरवरी को मेरठ बंद रहेगा। वहीं सेंट्रल मार्केट के अनिश्चितकालीन बंद के बीच कुछ गलियों की दुकानें भी बंद रहीं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में छिटपुट दुकानें खुलने से व्यापारियों के बीच आपसी सामंजस्य को लेकर खींचतान देखी गई।
मंत्री से मुलाकात के बाद पलटा फैसला
व्यापारियों ने आमसभा में 21 व 22 फरवरी को मेरठ बंद का निर्णय लिया था। इस निर्णय पर सभी व्यापारियों ने सहमति दी थी, लेकिन देर शाम व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ऊर्जा मंत्री सोमेंद्र तोमर से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने काफी देर मंत्री से वार्ता की। राज्यमंत्री से मिलकर आए व्यापारियों ने जब मंच से अनिश्चतकालीन बंद टालने की घोषणा की तो इसके विरोध में अन्य व्यापारियों ने इसका विरोध कर दिया और नारेबाजी की। इस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ लोगों ने नारे लगाए। जैसे तैसे बुजुर्ग व्यापारियों ने दखल देकर उन्हें शांत कराया।
विभिन्न संगठनों का मिला व्यापक समर्थन
इस आंदोलन को शहर के अन्य व्यापारिक संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है। पवन मित्तल ने कहा कि व्यापार बचाने को व्यापारी मरने-कटने को भी तैयार हैं। जीतू नागपाल ने कहा कि व्यापारी को अपना दूसरा रूप दिखाते हुए अब लट्ठ से समझाना होगा। शैंकी वर्मा ने समाधान न होने पर पीएम के विरोध का ऐलान किया। विजय आनंद अग्रवाल ने कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा घर के दरवाजे पर डिलीवरी दी जा रही है। ऐसे में बाजार को ध्वस्त किए जाने का क्या औचित्य है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा, हैंडलूम व्यापार संघ के प्रधान अंकुर गोयल, हापुड़ अड्डा व्यापार मंडल के अकरम गाजी, विष्णु दत्त पाराशर ने बंद का समर्थन किया। पूर्व पार्षद संजीव पुंडीर और वीरेंद्र शर्मा बिल्लू ने व्यापारियों से एकता के साथ डटे रहने की अपील की। ने भी समर्थन दिया। छात्र नेता विनीत चपराणा ने कहा कि चौधरी चरण सिंह विवि का एक-एक छात्र व्यापारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।