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सेंट्रल मार्केट: भीषण गर्मी में महिलाओं का धरना जारी, जनप्रतिनिधियों पर बरसीं, कहा-वोट मांगने आए-अब हुए गायब

Mon, 20 Apr 2026 11:19 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सेटबैक और सीलिंग के विरोध में महिलाओं का धरना 11वें दिन भी जारी रहा। महिलाओं ने जनप्रतिनिधियों पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि दो दिन में समाधान न हुआ तो बड़ा कदम उठाया जाएगा।

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मेरठ सेंट्रल मार्केट में धरने पर महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में सेटबैक और सीलिंग के विरोध में महिलाओं का धरना रविवार को 11वें दिन भी जारी रहा। धरने पर बैठी महिलाओं ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय हाथ जोड़कर और पैर छूकर वोट मांगने आने वाले सांसद, विधायक और महापौर अब पूरी तरह गायब हैं। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि दो दिन के भीतर जनप्रतिनिधि उनकी समस्या का समाधान करने नहीं आए तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगी।

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सीलिंग और सेटबैक को लेकर जारी है विरोध
दरअसल, सेंट्रल मार्केट में सीलिंग की कार्रवाई के बाद से व्यापारी और स्थानीय लोग आक्रोशित हैं। सेक्टर-दो में महिलाएं सेटबैक छोड़ने की अनिवार्यता के विरोध में धरने पर बैठी हैं। रविवार को धरने के दौरान आयोजित पत्रकार वार्ता में महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस धरना खत्म कराने के लिए उन्हें मुकदमे दर्ज करने की धमकी दे रही है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को 661/6 समेत सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। ध्वस्तीकरण में देरी का आरोप लगाते हुए आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।

इसके बाद 27 जनवरी को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने छह सप्ताह के भीतर कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए थे। सेंट्रल मार्केट में कुल 860 आवासीय भवन बताए गए हैं, जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। इनमें से 144 व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराया जा चुका है।

661/6 को ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि 44 भवनों पर आठ अप्रैल को सील लगाई गई थी। अब 815 आवासीय भवनों के लिए आवास विकास परिषद की ओर से दो सप्ताह में निर्माण हटाने का नोटिस जारी किया जाएगा।
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सेटबैक के नाम पर मकान गिरने का डर
धरने पर बैठीं महिलाओं का कहना है कि सेक्टर-दो में अधिकतर मकान दुर्बल और अल्प आय वर्ग के हैं। इनमें पतली दीवारों वाले छोटे मकान हैं, जहां लोग पिछले 35 से 40 वर्षों से रह रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि यदि इन छोटे मकानों में सेटबैक छोड़ा गया तो मकान गिर जाएंगे और आसपास के घरों को भी खतरा पैदा हो जाएगा।

पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप
धरने पर बैठी महिलाओं ने पुलिस पर भी दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि धरना खत्म कराने के लिए पुलिस उन्हें और उनके बच्चों पर मुकदमे दर्ज करने की धमकी दे रही है। वहीं तिरंगा चौक व्यापार संघ के अध्यक्ष मनोज गर्ग ने भी पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि व्यापारी प्रशासन या पुलिस के दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

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