सेंट्रल मार्केट में सीलिंग प्रक्रिया
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शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में 44 व्यावसायिक निर्माणों पर सीलिंग की कार्रवाई के बाद पूरे बाजार में वीरानी छा गई है। सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण आदेश के बाद से ही व्यापारियों में हड़कंप था जिसके चलते लगभग 150 दुकानदारों ने खुद ही शटर हटाकर वहां दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां लगा लीं। सीलिंग की इस कार्रवाई ने जहां व्यापारियों की कमर तोड़ दी है वहीं यहां काम करने वाले हजारों श्रमिकों के सामने भी आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
व्यापारियों के अनुसार खुद बंद की गई दुकानों से सीधे तौर पर 10 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। बुधवार को हुई 44 भवनों की सीलिंग से इनमें स्थित 350 से अधिक दुकानें बंद हो गईं, जिससे गारमेंट्स, स्पोर्ट्स, बैग, खान-पान की दुकानों सहित स्कूल और अस्पतालों में काम करने वाले करीब 5 हजार लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। व्यापारियों का अनुमान है कि इस पूरे प्रकरण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 40 हजार लोगों की जीविका प्रभावित हुई है। शनिवार को भी व्यापारियों और श्रमिकों ने इकट्ठा होकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और प्रदर्शन किया।
23 साल का साथ छूटा, अब 51 की उम्र में कहां जाएं
दुकानों और संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों के चेहरे पर भविष्य को लेकर गहरी चिंता है। पिछले 23 साल से एक गारमेंट्स की दुकान पर काम कर रहे कमल (51 वर्ष) कहते हैं कि इस उम्र में अब वे नया काम कहां ढूंढेंगे और कौन उन्हें रोजगार देगा।
स्कूल में पिछले 7-8 साल से पढ़ा रही शिक्षिकाओं आशा, प्रिंसी और नगमा ने बताया कि स्कूल बंद होने से पूरा स्टाफ मायूस है। प्रबंधक को आसपास कोई व्यावसायिक स्थान नहीं मिल रहा। यदि स्कूल दूर शिफ्ट होता है तो परिवार वाले वहां जाकर काम करने की अनुमति देंगे या नहीं यह बड़ी चुनौती है।
रिश्तेदारों से उधार लिया, पर मालिक से नहीं मांग रहे वेतन
दुकानों पर काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी अपने मालिकों के प्रति बेहद निष्ठावान नजर आए। उनका कहना है कि जब उनके मालिकों का जीवनभर का व्यापार उजड़ गया है तो वे अपनी तनख्वाह के लिए उन पर दबाव कैसे डालें। आमतौर पर हर महीने की 7 तारीख को मिलने वाला वेतन इस बार अटक गया है।
श्रमिकों ने बताया कि वे वर्तमान में दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेकर घर का खर्च चला रहे हैं। उन्हें अपने मालिकों पर पूरा भरोसा है कि हालात सामान्य होते ही उनकी तनख्वाह मिल जाएगी। श्रमिकों ने सरकार से मांग की है कि व्यापारियों को जल्द पुनर्स्थापित किया जाए ताकि उनसे जुड़े हजारों लोगों का रोजगार सुरक्षित रह सके।