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सेंट्रल मार्केट मामला: सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक, सब खामोश, शहर के नेताओं में नहीं दिखी 2014 जैसी एकजुटता

Sun, 26 Oct 2025 10:27 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम आशुतोष भारद्वाज, मेरठ

सार

Meerut News: 2014 में कॉम्प्लेक्स को बचाने के लिए पूरा शहर एकजुट हो गया था। मगर इस बार नजारा कुछ बदला हुआ दिखाई दिया। इधर हथौड़ा चलाया जा रहा था, उधर, पक्ष-विपक्ष के जनप्रतिनिधि मौके पर आए तक नहीं।
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सेंट्रल मार्केट में चलती जेसीबी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सेंट्रल मार्केट के कॉम्पलेक्स को बचाने के लिए दिसंबर 2014 में सत्ता से लेकर विपक्ष के जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों से लेकर भारी जनसमूह विरोध में उमड़ पड़ा था। कड़े विरोध के कारण ही आवास विकास और पुलिस प्रशासन की टीम को पीछे हटना पड़ गया था। इस बार सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और बदले सियासी हालात के बीच माहौल एकदम अलग रहा। सत्ता से विपक्ष तक के जनप्रतिनिधि इस बार खामोश रहे।

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उस दौर में इस कॉम्प्लेक्स को बचाने के लिए हुए आंदोलन में विधायक अतुल प्रधान, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता, विधायक अमित अग्रवाल, पूर्व विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, संरक्षक अरुण वशिष्ठ, संरक्षक विजेंद्र अग्रवाल अग्रणीय भूमिका में रहे। तब ध्वस्तीकरण का आदेश आते ही तब पूरे शहर के व्यापारी एकजुट हो गए थे।
 

संयुक्त व्यापार संघ ने शहर के बाजारों को बंद करने की घोषणा कर दी थी। व्यापारियों ने एलान कर दिया था कि यदि कार्यवाही के नाम पर एक भी हथौड़ा चला तो कोहराम मच जाएगा। व्यापारियों के उग्र रूप को देखते हुए 2014 में संयुक्त आवास आयुक्त दीपचंद्र की अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में व्यापारियों के साथ वार्ता हुई। इसके बाद तुरंत लखनऊ में तत्कालीन आवास आयुक्त शाहबुद्दीन से बात की गई। उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील के विषय में भी बताया गया। तब कार्यवाही को स्थगित किया गया।
 

तब सेंट्रल मार्केट में था जंतर-मंतर जैसा नजारा
वर्ष 2014 में तब सेंट्रल मार्केट क्षेत्र पूरी तरह जंतर-मंतर में तब्दील हो गया था। सेंट्रल मार्केट की मुख्य इमारत से लेकर चौराहे, गली और सड़क पर जगह जगह लोगों का जमावड़ा था। कोई चौराहे पर नारेबाजी कर विरोध जता रहा था तो किसी ने धरना देकर रास्ता बंद कर रोष व्यक्त किया। शास्त्रीनगर का भी तब कुछ ऐसा ही नजारा था।

यह बोले जनप्रतिनिधि और व्यापारी...

अपने लोगों के आंसू देखने की हिम्मत नहीं
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण बड़े लोग पीछे हट गए। अपने लोगों के आंसुओं को देखकर उनके सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं हो पा रही है। 
- नवीन गुप्ता, अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार संघ।

जिनसे वोट लो, उन्हें दो सुरक्षा
- भाजपा सरकार पूरी तरह विफल है। जिनसे वोट लेती है, उसी को सुरक्षा नहीं देती है। जिनसे वोट लो, उन्हें सुरक्षा तो दी जाए। वर्ष 2014 में इसी कांप्लेक्स को बचाया था। आज मैं बिहार में हूं। 
- अतुल प्रधान, विधायक।

अगर व्यापारी हुए नाराज तो परिणाम आएंगे सामने
- व्यापारियों के साथ गलत हुआ है। अगर व्यापारी नाराज हुए तो भविष्य में इसके परिणाम सामने आएंगे। सुप्रीम कोर्ट के सामने कोई नहीं बोल सकता है। 
- बिजेंद्र अग्रवाल, संरक्षक, संयुक्त व्यापार संघ।

अब बंद हो गए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे
- 2014 में पूरा शहर एकजुट हुआ, तब कुछ गुंजाइश थी। तब मामले में सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे। अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे बंद हो गए। ऐसे में सरकार और संगठन कोई कुछ नहीं कर सकता है। आज मन दुखी है। 
- अरुण वशिष्ठ, सदस्य, राष्ट्रीय परिषद, भाजपा।
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निर्माण कराने वाले अधिकारियों पर भी हो कार्यवाही
- शहर के इतिहास से जुड़े कॉम्प्लेक्स को तोड़ते हुए देखना संभव नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता लोगों के भले का कार्य करे। इस घटना में परिवार बहुत परेशान है। जिस समय पर बिल्डिंग बनी, उस समय जो भी सरकारी अफसर थे, उन पर भी सख्ती से कार्यवाही हो। 
- कमल दत्त शर्मा, भाजपा नेता।

व्यापारियों के हित की भी सोचे सरकार
- सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट मामले में ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया। इससे व्यापारियों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को धक्का लगा है। सरकार को भी व्यापारियों के हित में सोचकर आगे आना चाहिए। 
- सुरेश जैन ऋतुराज, पूर्व महानगर अध्यक्ष, भाजपा।

22 व्यापारियों को दुकान दिलाने का करेंगे प्रयास
2014 में हुई कार्यवाही प्रशासन द्वारा की गई। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्तीकरण हुआ है। अभी तक बचाव के हरसंभव प्रयास किए गए। अब प्रयास किया जाएगा प्रभावित लोगों को दुकान उपलब्ध कराई जाए। 
- अमित अग्रवाल, विधायक, मेरठ कैंट।
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