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सेंट्रल मार्केट प्रकरण: 6500 आवासीय संपत्तियों में से 800 में दुकानें-शोरूम, जिम्मेदार अफसर भी नपेंगे

Wed, 18 Dec 2024 03:01 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

यहां अवैध दुकानें बना ली गईं, जिनमें अस्पताल, डेयरी, हैंडलूम, बेकरी, रेस्टोरेंट आदि चल रहे हैं। आवास विकास की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की गईं, जिस पर मंगलवार को फैसला सुनाया गया।
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सेंट्रल मार्केट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में घर-घर में शोरूम और कॉम्पलेक्स बनकर तैयार होते गए, जबकि अफसर सोए रहे। आपसी साठगांठ और सेटिंग-गेटिंग के चलते 1995 से सेंट्रल मार्केट के आबाद होने का सिलसिला जो एक बार शुरू हुआ तो लगातार अवैध निर्माण होते रहे। अब मौजूदा समय में मुख्य मार्ग ही नहीं, भीतरी गलियों में भी आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवास एवं विकास परिषद की ओर से सर्वे में यह खुलासा हुआ था। विभाग ने शास्त्रीनगर के विभिन्न सेक्टर और ब्लॉक की संपत्तियों का मौका-मुआयना किया था। इनमें 6500 आवासीय भवनों में से 800 में व्यावसायिक प्रयोग होता मिला। इनमें दुकानें बना ली गईं, जिसमें अस्पताल, डेयरी, हैंडलूम, सैलून, बेकरी, रेस्टोरेंट समेत विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। विभाग की ओर से ये ही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं, जिस पर मंगलवार को फैसला सुनाया गया।
 

सुप्रीम कोर्ट में 19 नवंबर को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला व न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने एक दुकानदार राजेंद्र कुमार बड़जात्या व उप्र एवं आवास विकास परिषद के मामले में सुनवाई की थी। सभी पक्षकारों से एक सप्ताह में लिखित में पक्ष मांगा गया। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उप्र आवास एवं विकास परिषद से 499 प्लॉटों का किस प्रकार प्रयोग हो रहा है, इस पर जवाब मांगा था। आदेश के बाद से ही विभाग की ओर से टीमों का गठन कर सर्वे शुरू कर दिया गया था। सप्ताह भर में साढ़े छह हजार आवासीय संपत्तियों का मौका-मुआयना किया गया।
 

ये बनाई रिपोर्ट 
रिपोर्ट में बताया गया कि इनमें 800 संपत्तियां ऐसी हैं जो आवासीय हैं और उनमें व्यावसायिक गतिविधियां हो रही हैं। लोगों ने घर में शटर लगाकर दुकानें बना ली हैं। सर्वोच्च न्यायालय में आवास विकास ने ये ही पक्ष दाखिल किया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने आदेश जारी किए।
 

सेक्टर-2 व 6 में सबसे ज्यादा दुकानें
सर्वे में सेक्टर-2 व छह में घरों में सबसे ज्यादा दुकानें मिली हैं। सेंट्रल मार्केट के अंतर्गत ही यह क्षेत्र आता है। इसके अलावा सेक्टर-3, 4, 5 व 7 में भी लोगों ने घरों में दुकानें बना ली हैं। इसके अलावा एल-ब्लॉक में मुख्य मार्ग पूरी तरह व्यावसायिक में परिवर्तित हो गया है। कई ब्लॉक में तो कुछ लोगों ने कोठियों में ही व्यावसायिक गतिविधियां कर रखी हैं। सबसे कम सेक्टर-12 में महज दो ही आवासीय भवनों में व्यावसायिक प्रयोग होते टीम को मिला था।
 
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नीचे शोरूम और ऊपर मकान
सेंट्रल मार्केट में सराफा, डेयरी, रेडीमेड गारमेंट्स, मर्चेंट स्टोर आदि लगातार बन रहे हैं। कई लोगों ने क्षेत्र में निचले तल पर शोरूम बना लिए हैं और ऊपरी तल पर रिहाइश हो रही है। अफसरों से साठगांठ करके बड़े पैमाने पर गली-गली में भी दुकानें, शोरूम बन रहे हैं। व्यापारी इसके लिए अफसरों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिन अफसरों के समय में अवैध निर्माण हुए, उन पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।


 
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