- एमए, एमएससी और एमकॉम में 36 प्रतिशत अंक अनिवार्य, विद्यार्थियों को कृपांक नहीं मिलेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति-2020 के तहत संचालित परास्नातक पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा और मूल्यांकन संबंधी नियम निर्धारित कर दिए हैं। सत्र 2026-27 से लागू होने वाले इन नियमों के तहत एमए, एमएससी और एमकॉम के विद्यार्थियों को प्रत्येक प्रश्नपत्र में कुल 100 में से न्यूनतम 36 अंक प्राप्त करने होंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की बाह्य परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन में अलग-अलग उत्तीर्ण होना भी अनिवार्य होगा। बाह्य परीक्षा में 70 में से कम से कम 21 और आंतरिक मूल्यांकन में 30 में से कम से कम नौ अंक लाने होंगे। किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों को कृपांक नहीं दिए जाएंगे।
नए नियमों के तहत परास्नातक के द्वितीय वर्ष के चौथे सेमेस्टर में औद्योगिक प्रशिक्षण, सर्वेक्षण अथवा शोध परियोजना में से चयनित कार्य को शोध परियोजना माना जाएगा। विद्यार्थी को यह परियोजना विभाग के पूर्णकालिक शिक्षक के निर्देशन में पूरी करनी होगी। इसका मूल्यांकन अधिकतम 100 अंकों के आधार पर होगा। इसमें शोध प्रबंध के लिए 80 अंक निर्धारित किए गए हैं जबकि शेष 20 अंक शोध कार्य के आधार पर दिए जाएंगे। शोध से संबंधित पत्र के संदर्भित शोध पत्रिका में प्रकाशित होने, पेटेंट प्राप्त करने, पुस्तक के अध्याय के प्रकाशन अथवा राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध पत्र प्रस्तुत करने पर गुणवत्ता के अनुसार अंक मिल सकेंगे। शोध प्रबंध का मूल्यांकन विभागीय परीक्षक समिति करेगी। इसमें निर्देशन करने वाले शिक्षक के साथ कुलपति की ओर से नामित बाहरी विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।
अगले सेमेस्टर में मिलेगा प्रवेश
विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार विद्यार्थियों को वर्तमान सेमेस्टर के परिणाम की परवाह किए बिना अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत किया जाएगा। हालांकि, अनुत्तीर्ण विषयों को पास करने के लिए बैक पेपर परीक्षा देनी होगी। सम सेमेस्टर के विषयों की बैक पेपर परीक्षा सम सेमेस्टर में और विषम सेमेस्टर के विषयों की परीक्षा विषम सेमेस्टर में ही दी जा सकेगी। एक सेमेस्टर में अधिकतम 12 क्रेडिट तक के सैद्धांतिक और प्रायोगिक विषयों की बैक पेपर परीक्षा देने की अनुमति होगी। विद्यार्थी एक साथ दो पूरे सेमेस्टर की परीक्षाएं नहीं दे सकेंगे।
दो साल में श्रेणी सुधार का अवसर
परास्नातक की उपाधि पूरी करने के बाद विद्यार्थियों को दो वर्ष के भीतर किसी एक सेमेस्टर की संपूर्ण बाह्य सैद्धांतिक परीक्षा में शामिल होकर श्रेणी सुधारने का अवसर मिलेगा। बैक पेपर और श्रेणी सुधार की परीक्षा के लिए उस समय संचालित संबंधित सेमेस्टर का पाठ्यक्रम लागू होगा। दो वर्षीय परास्नातक पाठ्यक्रम को पूरा करने की अधिकतम अवधि चार वर्ष निर्धारित की गई है।
अंकों के आधार पर ऐसे तय होगी श्रेणी
नियमों में संचयी ग्रेड बिंदु औसत (सीजीपीए) के आधार पर श्रेणी निर्धारित करने की व्यवस्था भी की गई है। 6.50 से 10 तक सीजीपीए प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी, पांच से 6.50 से कम सीजीपीए वालों को द्वितीय श्रेणी और चार से पांच से कम सीजीपीए वालों को तृतीय श्रेणी मिलेगी। सीजीपीए को प्रतिशत में बदलने के लिए उसे 9.5 से गुणा किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने ग्रेड के लिए भी अंक सीमा निर्धारित की है। 91 से 100 अंक पर 10 ग्रेड अंक, 81 से 90 पर नौ, 71 से 80 पर आठ, 61 से 70 पर सात, 51 से 60 पर छह, 41 से 50 पर पांच और 36 से 40 अंक पर चार ग्रेड अंक मिलेंगे। 36 से कम अंक प्राप्त करने पर विद्यार्थी अनुत्तीर्ण माना जाएगा। अनुपस्थित रहने पर भी शून्य ग्रेड अंक दर्ज होंगे।