अगर कहीं बाल विवाह हो रहा है तो पुलिस कार्रवाई करे। ये न कह दे कि हमारे पास तो कोई शिकायत नहीं है। ये कानून, रोकना पड़ेगा। बेटियों से उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनकर जिओ। उन्होंने कहा कि मैं छात्र-छात्राओं को जेल विजिट पर भेजती हूं फिर उनसे पूछती हूं कि क्या देखा, वे बताते हैं कि दहेज के लिए सास ने बहू को मार दिया, अब वह सजा काट रही है। दहेज हत्या के मामलों में बहुत महिलाएं जेल में हैं।
यह भी पढ़ें: मुठभेड़ की तस्वीरें: सपा नेता के घर डकैती डालने वाले बदमाश दबोचे, घंटों हुई पूछताछ, अब सामने आएगा वारदात का सच
उन्होंने कहा कि समाज की इन कुरीतियों को दूर करने की जिम्मेदारी समाज की ही है, जब तक हम अग्रसर नहीं बनेंगे तब यह चलता रहेगा, हमारी बेटियां मरती ही रहेंगी। हम वहां जाकर शोक व्यक्त करेंगे, बैठकर वापस आ जाएंगे। इससे आगे बढ़ना होगा।
दीक्षा के बाद का समय महत्वपूर्ण, जीवन में है ऊंचा स्थान: डॉ. बजाज
मुख्य अतिथि पद्मश्री डा. जेके बजाज ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब आप जीवन की एक अवस्था को पूरी कर दूसरी में प्रवेश कर रहे हैं। दीक्षांत वह समय है जब आप ब्रह्मचर्याश्रम से गृहस्थाश्रम की ओर बढ़ते हैं। अब तक आप विद्यार्थी थे अपने भरण एवं संरक्षण के लिये परिवार समाज एवं राष्ट्र पर निर्भर थे, लेकिन इसके बाद आप खुद जीविका खोजेंगे और रोजगार करेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन जिस अवस्था में आप प्रवेश कर रहे हैं उसका जीवन में बहुत ऊंचा स्थान है।
महाभारत के प्रसंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब युधिष्ठिर अपने बंधुओं से लड़ने से बचने के लिए विरक्ति की ओर होने लगते हैं तो उनके चारों भाई, अर्जुन, सहदेव, नकुल और भीम बारी-बारी से उन्हें गृहस्थाश्रम का महत्व समझाते हैं। अंत में द्रोपदी उन्हें बताती है कि सभी का भरण-पोषण और संरक्षण करना ही उनके लिए धर्म मार्ग है। इससे बचकर संन्यास की बात करना कायरता है। उन्होंने कहा कि छात्रों को तैत्तिरीयोपनिषद् की शीक्षावल्ली के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए।