माछरा। गोआश्रय से पशुपालक गोवंश ले गए थे। इसके ढाई माह बीतने के बाद भी उन्हें अनुदान नहीं मिल पा रहा है। इससे उन्होंने पशुओं को गोआश्रय में पशु वापस करने का निर्णय किया है। वे उन पशुओं के चारे आदि की व्यवस्था अपनी जेब से कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से अनुदान शीघ्र दिलाए जाने की मांग की है।
माछरा में पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अस्थायी गोआश्रय केंद्र बनाया गया था। प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि यदि कोई भी पशुपालक गोशाला से पालने के लिए पशु ले जाएगा। उसे 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान मिलेगा। माछरा स्थित गोआश्रय में ढाई माह पूर्व 48 पशु थे। इनमें से माछरा, कासमपुर, नंगलाशाहू आदि समेत अन्य गांवों के ग्रामीण 19 गोवंश को पालने के लिए ले गए थे। वे तभी से पशुओं का खर्च अपनी जेब से उठा रहे हैं। उन्हें अनुदान नहीं मिल रहा है। अब वह चारा आदि की व्यवस्था करने में स्वयं को असमर्थ बता रहे हैं।
पशुपालक जयवीर, मनवीर एवं प्रवेश आदि का कहना है कि उन्हें 900 रुपये महीना पशुपालन के लिए नहीं मिल रहा है। ढाई माह गुजर चुके हैं परंतु अब तब गोवंश पशुओं को वापस गोआश्रय माछरा में एक-दो दिन में बांध देंगे। वे सरकार के रवैए से परेशान हैं। अब भी गोआश्रय में 34 पशु हैं। कोई भी पशुपालक उन्हें लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। गोआश्रय संचालक कासमपुर के ग्राम प्रधान शिवराज भाटी ने बताया कि गांवों के लोग पशु छोड़कर जा रहे हैं। हालांकि यह गोआश्रय आवारा, बेसहारा पशुओं के लिए है। डीएम एवं एसडीएम को ऐसे पशुपालकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
उधर, नोडल अधिकारी केके राणा ने बताया कि उनके पास सभी पशुपालकों के खाता है। शासन से अनुदान 900 रुपये पशुपालकों के खाते में जाएगा उन्होंने सूची बनाकर डीएम मेरठ को अनुमोदन के लिए भेजी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पैसा शीघ्र खातों में आएगा। उधर, एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव ने बताया कि वह जानकारी करके अनुदान शीघ्र पशुपालकों के खाते में भिजवाएंगे। गोवंश को गोआश्रय में लाने की जरूरत नहीं है।