नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में उपद्रव के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर एक युवक ने सोशल मीडिया पर फर्जी मैसेज वायरल कर दिया। मैसेज में उसने एक हॉस्टल में छात्रों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा बदसलूकी करने के आरोप लगाए। मामला गलत पाए जाने पर हॉस्टल प्रबंधन की तरफ से आरोपी युवक के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है।
मुजफ्फरनगर में सीएए को लेकर गत 20 दिसंबर को शहर क्षेत्र में उपद्रव हुआ था। पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें एक हॉस्टल में रह कर पढ़ने वाले मदरसे के छात्र भी शामिल थे। जांच के बाद उक्त सभी छात्रों को छोड़ दिया गया था, जबकि जेल भेजे गए 12 अन्य छात्रों को भी बेकसूर मानते हुए रिहा करा दिया गया था। उक्त मामले में कुछ दिन पूर्व सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल किया गया, जिसमें पुलिस पर बवाल के दौरान हॉस्टल में घुसकर छात्रों से बदसलूकी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। मैसेज से जहां हॉस्टल की प्रतिष्ठा धूमिल हुई तो पुलिस भी कठघरे में आ गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज को गंभीरता से लेते हुए हॉस्टल प्रबंधन ने अपने स्तर से जांच कराई, जिसमें छात्रों ने पुलिस द्वारा किसी भी तरह की बदसलूकी किए जाने से इनकार कर दिया। हॉस्टल प्रबंधन की ओर से गांव सैदपुर खुर्द निवासी नईम आलम द्वारा सिविल लाइंस थाने में तहरीर देकर वायरल के आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
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उपद्रव के मामले में आरोपी ने पुलिस पर हॉस्टल के छात्रों से बदसलूकी किए जाने के आरोप लगाते हुए फर्जी मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल किया था। जांच में उक्त आरोप गलत पाए गए, जिसके बाद हॉस्टल प्रबंधन ने आरोपी के खिलाफ तहरीर दी थी, उस पर रिपोर्ट दर्ज कर जांच एसआईटी को दे दी गई है।
- एसएसपी अभिषेक यादव
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