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बेबस मरीज: दवाओं की दूसरी मार, 300 रुपये की कैंसर दवा की एमआरपी 4867 रुपये; महंगे इलाज ने बढ़ाई मुश्किल

Tue, 06 Oct 2026 03:28 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर

सार

सहारनपुर में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर सामने आया है। पड़ताल में 300 रुपये में मिलने वाली एक दवा की एमआरपी 4867 रुपये तक मिली। मरीजों और तीमारदारों के लिए इलाज के साथ महंगी दवाओं का खर्च उठाना चुनौती बना हुआ है।
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दवाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के सामने इलाज के खर्च के साथ महंगी दवाओं का बोझ भी बढ़ रहा है। सहारनपुर में सोमवार को की गई पड़ताल में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं की खरीद कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर सामने आया। किशनपुरा स्थित थोक दवा बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, वोरियर 200 एमजी टैबलेट की खरीद कीमत करीब 300 रुपये है, जबकि इसकी एमआरपी 4867 रुपये तक दर्ज है।

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होलसेल से निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर तक पहुंचती हैं दवाएं
महानगर का किशनपुरा होलसेल दवा बाजार आसपास के राज्यों और अन्य जिलों में बनने वाली दवाओं की सप्लाई का प्रमुख केंद्र है। यहां से दवाएं निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों तक पहुंचती हैं। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं में खरीद कीमत और एमआरपी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। कैंसर के साथ इस्तेमाल होने वाली कुछ एंटीबायोटिक दवाओं की एमआरपी भी खरीद कीमत से कई गुना अधिक बताई गई है।

यह भी पढ़ें: यूपी: आज सहारनपुर आएंगे रेलवे डीजी प्रकाश, त्योहारों से पहले स्टेशन की सुरक्षा-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा

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बाहर से दवा लेने पर भी उठे सवाल
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन जिला सहारनपुर के महासचिव प्रदीप लूथरा ने बताया कि कुछ मामलों में मरीज बाहर से दवा खरीदकर अस्पताल ले जाते हैं तो डॉक्टर उसे लेने से मना कर देते हैं। इसके बाद तीमारदारों को दवा वापस करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार डॉक्टरों के पर्चे ऐसे होते हैं, जिनकी लिखावट समझना मुश्किल होता है। उनके अनुसार, कुछ पर्चे कोड वर्ड में लिखे होने की बात भी सामने आई है।

प्रदीप लूथरा ने कहा कि दवाओं की कीमतों को लेकर सरकार की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। उन्होंने ड्रग प्राइस कंट्रोल अथॉरिटी एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि संबंधित दवा उसके अधीन नहीं होने के कारण कंपनियां एमआरपी तय करती हैं।

एक साल तक चला इलाज, महंगी दवाओं ने बढ़ाया खर्च
शिवाजी नगर निवासी अमिता शर्मा ने बताया कि करीब दो साल पहले जांच के दौरान उन्हें कैंसर का पता चला था। उस समय त्वचा के कैंसर की शुरुआती स्टेज थी। इसके बाद एक निजी अस्पताल में करीब एक साल तक इलाज चला। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान महंगी दवाओं का खर्च उठाना मुश्किल हो गया था। नियमित इलाज के बाद उन्होंने कैंसर को मात दी।

अलग-अलग जगहों पर दवा की कीमत में अंतर
उपलब्ध फैक्ट फाइल के अनुसार, संबंधित दवा की कीमत में अलग-अलग स्तर पर अंतर बताया गया है। होलसेल मेडिकल स्टोर पर कीमत करीब 700-750 रुपये, रिटेल मेडिकल स्टोर पर 3400-3500 रुपये और निजी अस्पताल में 500-550 रुपये बताई गई है। वहीं एक दवा की खरीद कीमत 300 रुपये और एमआरपी 4867 रुपये तक दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
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शासन को अवगत कराया जाएगा: सहायक आयुक्त औषधि
सहायक आयुक्त औषधि नरेश मोहन दीपक ने कहा कि अभी उनके पास इस तरह का कोई मामला नहीं आया है। अगर दवाओं के रेट में अंतर है तो शासन को अवगत कराया जाएगा। शासन से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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