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आपबीती! मां आज जिंदगी का शायद आखिरी दिन...मौत को सामने देख रो पड़े थे जवान,मंजर था खौफनाक

Sat, 21 Dec 2019 11:55 AM IST
Dimple Sirohi रिजवान खान, अमर उजाला, मेरठ
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बवाल में फंसे थे 30 रंगरूटों सहित आरएएफ के दो जवान - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में पीएसी के 30 रंगरूट और आरएएफ के दो जवान 20 दिसंबर का दिन शायद ही कभी भूले। हिंसक भीड़ से बचने के लिए सभी एक दुकान में घुस गए थे, भीड़ ने देखा तो बाहर से शटर लगा दिया। जवानों के साथ यह संवाददाता भी था। बाहर से मारो...मारो की आवाज सुनाई दे रही थी। गोलियों की तड़तड़ाहट से कलेजा कांप रहा था। भीड़ चिल्ला रही थी कि पेट्रोल बम फेंककर इनको यहीं जला दो। ढाई घंटे सभी रंगरूट और जवान इसी कशमकश में रहे कि मौत अब आई...तब आई। फोन कर बोले- मां आज शायद जिंदगी की आखिरी दिन हो... आगे स्लाइडों में जानिए पूरा अपडेट-
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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला
कइयों ने घर फोन कर माता-पिता को भी बता दिया कि आज जिंदगी का शायद आखिरी दिन है। गनीमत रही कि फोर्स ने ढाई घंटे बाद सभी को सकुशल बचा लिया।
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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला
पीएसी के 30 रंगरूट मेरठ में ट्रेनिंग ले रहे हैं। बवाल के चलते इनको हापुड़ अड्डे पर डंडा लेकर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कोतवाली के साथ भेज दिया गया था। पहले यह कोतवाली पहुंचे। यहां से फिर यह कमेला रोड होते हुए हापुड़ रोड आ गए।

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आला अफसर - फोटो : अमर उजाला
यहां सिटी हॉस्पिटल के सामने उमर नगर से अचानक भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने भीड़ को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ उग्र हो गई। हजारों लोगों की भीड़ ने चारों तरफ से पुलिस को घेर लिया। सीओ कोतवाली और सिटी मजिस्ट्रेट भीड़ से भिड़ गए।
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बवाल में पुलिसकर्मी घायल - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भीड़ ने मकानों की छतों से पथराव शुरू कर दिया। हर तरफ से नारेबाजी होने लगी। फोर्स की संख्या सिर्फ 50-60 थी। हजारों की भीड़ को देखकर फोर्स को वहां से वापस होना पड़ा।
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दुकान में कर दिए बंद

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बवालियों ने जमकर पथराव किया - फोटो : अमर उजाला
सीओ, सिटी मजिस्ट्रेट और रंगरूट पथराव के चलते वहां से भागने को मजबूर हो गए। अफसर और दूसरे पुलिसकर्मियों ने तो पोजीशन ले ली, लेकिन रंगरूट और दो आरएएफ के जवान पथराव होने पर एक दुकान में जा घुसे। भीड़ ने वहां पहुंचकर दुकान का शटर गिराकर ताला लगा दिया। इससे सारे पुलिसकर्मी दुकान के भीतर बंद हो गए। तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक ढाई घंटे सभी रंगरूट भीतर बंद रहे। बाहर से गोलियों की आवाज आ रही थी। आंसू गैस भी परेशान कर रही थी। कई बार बाहर से शोर सुनाई दिया कि इनको आग लगाकर जला डालो।
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आंसू गैस गोले फैंके - फोटो : अमर उजाला
पहली बार इस मंजर को सहने वाले रंगरूटों की आंख से घर के लोगों को याद कर आंसू बहने लगे। उनको लगा कि आज जिंदगी का यह आखिरी दिन है। कई रंगरूटों ने घर पर फोन मिलाकर कह दिया कि अब बचना मुश्किल है। पीएसी औैर दूसरी जगहों से रंगरूटों के पास फोन आने लगे कि पुलिस उनको निकालने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों को सब फोन मिलाते रहे लेकिन ढाई घंटे तक कोई नहीं पहुंचा।
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बवालियों ने वाहनों में आग लगाई - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद साढ़े पांच बजे आरएएफ और कोतवाली सीओ ने मौके पर पहुंचकर ताला तोड़कर सभी रंगरूटों को बाहर निकाला तो सबकी जान में जान आई। उन्होंने बताया कि मेरठ में ट्रेनिंग के दौरान यह देखने को मिलेगा सोच भी नहीं सकते थे। 

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