उन्होंने 2 जनवरी 2019 में एक राष्ट्रीयकृत बैंक को संपत्ति हैंडओवर कर दी। इस बीच बैंक ने परतापुर और अन्य जगह की चार करोड़ रुपये की संपत्ति को दो करोड़ रुपये में बेच दिया। यह संपत्ति बेचकर आई दो करोड़ रुपये की राशि को बैंक ने लोन के मूल से न घटाकर ब्याज में से घटाया। ऐसे में कर्ज के मूल में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।
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उद्यमी का कहना है कि अब 26 अगस्त 2022 में रुड़की की फैक्टरी को भी 8.5 करोड़ रुपये में बेच दिया गया है, जबकि इस संपत्ति की कीमत 15 करोड़ रुपये से अधिक है। आठ सितंबर को संपत्ति का बैनामा, सेल लेटर और उस व्यक्ति को संपत्ति पर कब्जा भी दे दिया गया है।
प्रवीन कुमार जैन का कहना है कि बैंक की ओर से ओटीएस (एकमुश्त समाधान) का लाभ भी नहीं दिया गया है। उन पर अब भी 14 करोड़ के कर्ज का बोझ है। वहीं, फैक्टरी के 250 कर्मचारियों का रोजगार प्रभावित हुआ है। उद्यमी ने समस्या का समाधान न होने पर सांसद को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।