मेरठी में कंकरखेड़ा के सुभाषपुरी निवासी बंटी राठौर के संवाद बॉलीवुड फिल्मों में चार चांद लगा रहे हैं। बड़े-बड़े स्टारों की फिल्में में उन्होंने काम किया है। मायानगरी में उनके काम को सराहा भी खूब गया है। धमाल, जुगाड़, पोस्टर ब्वॉयज जैसी फिल्मों में उन्हें अपने संवाद दिए हैं। उनका सपना कोरियोग्राफर बनने का था। लेकिन संयोग से वह राइटर बन गए।
आठ भाई, बहनों में सातवें नंबर के बंटी की पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी। उनके पिता अमर सिंह बीएसएनएल में इंजीनियर थे। बंटी की पांच बहनें और दो भाई सरकारी विभाग में अच्छी पोस्ट पर हैं। पिता को बंटी के भविष्य की हमेशा चिंता रहती थी। बंटी ने मेरठ कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। उसके बाद मुंबई जाने का फैसला लिया। उनका सपना एक अच्छा कोरियोग्राफर बनने का था। 2001 में वह किस्मत आजमाने मुंबई चले गए। बॉलीवुड में अधिक प्रतिस्पर्धा के चलते वो कोरियोग्राफर तो नहीं बन पाए। लेकिन सात सालों तक संघर्ष करते हुए बंटी को फिल्म में राइटर बनने का मौका मिला। फिल्म लेखक अनुराग से दोस्ती हुई तो उन्होंने बंटी का हौसला बढ़ाया। यहीं से उनके जीवन में फिल्म लेखक बनने की इच्छा पैदा हुई। 2007 में उन्होंने फिल्म धमाल के लिए डॉयलाग लिखे। फिल्म हिट रही और संवाद भी दर्शकों को पसंद आए। इसके बाद बंटी ने लगातार कई बड़ी फिल्मों में संवाद दिए। गोलमाल-3, खिलाड़ी 786 और पोस्टर ब्वॉयज फिल्म को दर्शकों की काफी सराहना मिली।
संघर्ष में बीता जीवन
बंटी ने अपने जीवन में बहुत कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने बताया पिता की इच्छा के खिलाफ जाते हुए उन्होंने जिंदगी में कुछ अलग करने की सोची। यही कारण था कि बंटी ने सरकारी नौकरी न चुनकर संघर्षपूर्ण जिंदगी का रुख किया। जिसमें उन्हें थोड़ी देर से ही सही पर मंजिल मिली। एक समय था जब खाने तक के पैसे को लेकर उन्हें जद्दोजहद करते थे। लेखक बनकर वो मुंबई में एक अलग पहचान बना चुके हैं।