दरअसल, मुनकाद अली ने अपनी राजनीतिक शुरुआत बसपा से ही की और पार्टी में हर उतार-चढ़ाव के बावजूद पार्टी से जुड़े रहे। इसके अलावा मुस्लिमों को साधने के लिए भी बसपा का यह कार्ड है, क्योंकि पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बाद बसपा का बड़ा मुस्लिम चेहरा मुनकाद अली को ही माना जा रहा है।
आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े प्रदेश, उत्तर प्रदेश की प्रदेश स्तरीय बीएसपी संगठन की कमेटी में बुधवार को बदलाव किए गए। अगर बाबू मुनकाद अली के राजनीतिक कैरियर की बात करें तो वह साल 1994 में किठौर क्रय विक्रय समिति के डायरेक्टर बने और पार्टी में विधानसभा के अध्यक्ष रहे।
इसके बाद जिला अध्यक्ष भी रहे। प्रथम बार पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की सरकार में इन्हें अल्पसंख्यक आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया। इसके बाद मंडल अध्यक्ष और कई प्रदेशों के प्रभारी भी रहे।
मुनकाद अली साल 2006 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। साल 2012 में दोबारा राज्यसभा पहुंचे। इसके अलावा बीच-बीच में संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हुए मेरठ-सहारनपुर मुरादाबाद मंडल के कोऑर्डिनेटर रहे। इन्हें बिहार और झारखंड के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी भी दी गई।
पिछले लोकसभा चुनाव में राजस्थान का प्रभारी बना कर भेजा गया। अब वह यूपी के चार मंडल, मिर्जापुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा की जिम्मेदारी के साथ राष्ट्रीय महासचिव के पद पर तैनात थे।
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