धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ एंटी करप्शन ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 2015 में धर्मेंद्र अलीगढ़ में थाना अध्यक्ष था। उस दौरान भी वह रिश्वत लेता था, जिसका मुकदमा 5 साल बाद अलीगढ़ में लिखा गया। यह जानकारी पुलिस के आला अधिकारियों को थी। धर्मेंद्र के रिकॉर्ड में भी उसके कारनामों का लेखा-जोखा है। सवाल है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी उसे थानों का चार्ज कैसे मिलता रहा।
2016 में मेरठ में आया था धर्मेंद्र
अलीगढ़ में रिश्वत लेने के मामले में धर्मेंद्र सुर्खियों में था। 2016 में अलीगढ़ से मेरठ ट्रांसफर कराकर मेरठ आ गया। यहां आते ही उसे मेडिकल थाने का चार्ज मिल गया। भाजपा के विधायक का हाथ उसके सिर पर था। विधायक ने धर्मेंद्र की थानेदारी की कुर्सी मानो सुरक्षित कर ली थी।
धर्मेंद्र के खिलाफ मेरठ में दर्जनों शिकायतें अधिकारियों के पास पहुंचीं। इसके बावजूद उसे नहीं हटाया गया। एडीजी मेरठ जोन राजीव सभरवाल का कहना है कि धर्मेंद्र के खिलाफ अलग-अलग जांच चल रही है। मेरठ के बाद अलीगढ़ में धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मुकदमा भ्रष्टाचार का दर्ज हुआ। अलीगढ़ और मेरठ में पोस्टिंग रही है। अब दोनों जनपदों से उसकी जांच कराई जा रही है।