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ब्लू व्हेल ने ली जान, गेम के चक्कर में अशांत हो गया था निशांत का मन

Sun, 24 Sep 2017 11:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ शामली
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ब्लू व्हेल गेम ने ली एक और जान
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शामली में एलम जैसे छोटे कस्बे के छात्र निशांत की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं तो घटना ने अभिभावकों को भी चिंता में डाल दिया है। कुछ और छात्र भी ऐसे हो सकते हैं, जो इस जानलेवा खेल को खेल रहे हैं। निशांत की कक्षा के एक और छात्र के इस गेम को खेलने की बात उसके सहपाठियों ने ही बताई है। 
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कस्बा एलम निवासी निशांत उर्फ मिंटू ने बृहस्पतिवार को ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। उसके साथी अनंत और अन्य छात्रों की मानें, तो निशांत का मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लग रहा था। पिछले कुछ दिनों से उसका व्यवहार भी अजीब हो गया था। क्लास में टीचर गणित की किताब निकालनें को कहती थीं, तो वह हिंदी अथवा संस्कृत की किताब निकाल लेता था। क्लास में बैठकर भी वह अपने दोस्त शिवम के साथ मोबाइल फोन पर व्यस्त रहता था। इतना ही नहीं एलम से बस में स्कूल जाते समय और वहां से स्कूल की छुट्टी होने पर घर लौटते समय भी मोबाइल पर गेम खेलने का मोह कम नहीं हो रहा था और यह उसे आत्मघाती कदम उठाने की ओर ले गया। 

मेरठ की साइकलोजिस्ट डॉ. पूनम देवदत्त कहती हैं ब्लू व्हेल बच्चों को दिमागी रूप से इतना अक्षम बना देता है कि बच्चा सही-गलत का अंतर भूल जाता है। गेम क्यूरेटर खिलाड़ी को भावनात्मक तौर पर कमजोर कर देता है। इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों की अहम भूमिका है। बच्चा खतरनाक खेल का शिकार न बने इसलिए अभिभावक बच्चों पर पूरा ध्यान देकर इन बातों का ख्याल रखें। ब्लू व्हेल के किसी भी टास्क के लक्षण मिले तो फौरन बच्चे को मोबाइल से दूर करे साइकलॉजिस्ट की मदद लें। ब्लू व्हेल का चक्रव्यूह इतना जटिल है कि बच्चों का इससे निकलना बहुत मुश्किल होता है। 50 दिन के इस खेल का अंतिम टास्क ऊंची छत से छलांग लगाना है। यह बहुत ही खतरनाक है।
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देखें वीडियो : ब्लू व्हेल गेम का आतंक जारी, यूपी में एक और छात्र ने की आत्महत्या
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ब्लू व्हेल गेम खतरनाक है

प्रधानाचार्य, सिल्वर बेल्स स्कूल एके गोयल
प्रधानाचार्य, सिल्वर बेल्स स्कूल एके गोयल ने कहा कि ब्लू व्हेल गेम खतरनाक है। स्कूल अध्यापक और अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को समझाएं कि ऐसे खतरनाक गेम ना खेलें। 10 से 14 साल तक के बच्चों को समझाएं कि उनके लिए क्या ठीक है, क्या गलत है।

चेयरमैन बीएसएम स्कूल सूर्यवीर सिंह का कहना है कि बच्चों को अच्छे बुरे के बारे में बताया जाए। बच्चों की काउंसलिंग जरूरी है। फोन रखने पर प्रतिबंध तो नहीं लग सकता, लेकिन उन्हें जागरूक करके किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकता है। स्कूल अध्यापकों की जिम्मेदारी भी है कि बच्चों को समझाएं।

स्कूल प्रबंधनों को भी गंभीरता दिखानी होगी
डीएम इंद्र विक्रम सिंह का कहना है कि बेहतर शिक्षा दिलाने के साथ ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य के बारे में भी समाज को सोचना चाहिए। अभिभावकों और अध्यापकों की इसमें बड़ी भूमिका हो सकती है। वह बच्चों को समझाएं कि तकनीकी युग में क्या क्या उनके लिए फायदेमंद है और क्या खराब है। स्कूल प्रबंधनों को इसमें गंभीरता दिखानी होगी। ताकि बच्चों को अच्छे और बुरे का ज्ञान हो और वह किसी विपदा में फंसने से बच सकें।

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