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नीला ड्रम केस: 'जब तक मुस्कान को फांसी पर लटकता न देख लूं, चैन नहीं पड़ेगा'; सौरभ की मां का छलका दर्द

Wed, 14 Oct 2026 09:12 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

Meerut News: ब्रह्मपुरी में मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की हत्या कर दी। कोर्ट ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था। बुधवार को मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। सौरभ की मां ने कहा कि वह मुस्कान को फांसी होने तक चैन से नहीं बैठेंगी।

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सौरभ की मां रेनू। - फोटो : अमर उजाला

मुस्कान और साहिल को सजा सुनाने के दौरान बुधवार दोपहर सौरभ की मां रेनू देवी, उनके भाई बबलू व अन्य परिजन भी न्यायालय में मौजूद रहे। जिला जज के सजा सुनाते ही रेनू देवी व परिवार की अन्य महिलाओं की आंखों में आंसू छलकने लगे। रेनू देवी ने कहा कि जब तक इन्हें फांसी के फंदे पर लटकता ना देख लूं, तब तक मुझे चैन नहीं मिलेगा।

 

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मुस्कान। - फोटो : अमर उजाला

सौरभ की मां रेनू देवी ने रोते हुए कहा कि मुस्कान और साहिल ने जैसा जघन्य अपराध किया है, उसके लिए उन्हें मृत्युदंड ही मिलना चाहिए था। अगर कानून में इससे भी बड़ी कोई सजा होती, तो वह उसकी मांग करतीं।

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सौरभ और मुस्कान। - फोटो : अमर उजाला

रेनू देवी ने पुराना दर्द साझा करते हुए बताया कि नोटबंदी की रात (8 नवंबर 2016) को मुस्कान उनके बेटे सौरभ को घर से ले जाकर किराये के मकान में रहने लगी थी। इसके बाद 3 मार्च 2025 की रात उसने प्रेमी के साथ मिलकर उनके बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। मां ने बताया कि सौरभ पहले मर्चेंट नेवी और फिर मॉल में काम करता था। बाद में वह लंदन चला गया, ताकि परिवार को खुशहाल जिंदगी दे सके। 

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फैसला आने के बाद सौरभ की मां, भाई और अन्य परिजन। - फोटो : अमर उजाला

मां ने बताया कि वह हर महीने घर खर्च के लिए 50 हजार रुपये भेजता था। सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से भारत अपनी बेटी पीहू और पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाने आया था। उसे अंदाजा भी नहीं था कि जिस पत्नी के लिए वह विदेश में रात-दिन खून-पसीना बहा रहा है, वही उसकी जान की दुश्मन बन चुकी है।

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वकीलों ने फैसला आने के बाद मनाई खुशी। - फोटो : अमर उजाला

डिप्रेशन में पिता, भाई बोले– सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे
सौरभ के भाई बबलू ने बताया कि इस हत्याकांड ने पूरे परिवार को भीतर से तोड़ दिया है। सौरभ के पिता मुन्ना लाल आज तक गहरे डिप्रेशन में हैं और मां चैन से सो नहीं पाई हैं। भाई ने साफ किया कि जिला न्यायालय के इस फैसले से उन्हें न्याय मिला है। यदि दोषी इस सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाते हैं, तो दोनों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए वे सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

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साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी - फोटो : अमर उजाला

मुस्कान को मथुरा में दी जाएगी फांसी
मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जाएगी। यहां प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर है। मृत्युदंड के मामले में सत्र न्यायालय के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है। इसके बाद अपील और दया याचिका जैसी कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं। इसलिए फांसी की तारीख और सजा पर अमल की स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। मथुरा जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया है कि अगर कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आई तो मुस्कान को यही फांसी दी जाएगी।

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