व्हाइट फंगस के मामले पहले भी आते रहे हैं, यह बीमारी कैंडिडा नामक फंगस से होती है। यह उन लोगों में होती है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इनमें टीबी, एचआइवी और डायबिटीज के मरीज शामिल हैं। यह तब तक खतरनाक नहीं है जब तक रक्त में न पहुंच जाए। रक्त में पहुंचना दुर्लभ होता है। साधारण एंटी फंगल दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है।
लक्षण : व्हाइट फंगस
मुंह खोलने पर सफेद परत जैसी दिखती है। जब फंगस आहार नली में पहुंचती है तो खाना निगलने में तकलीफ होती है। इसे इंडोस्कोपी से देखा जा सकता है।
लक्षण: ब्लैक फंगस
नाक बंद होना, नाक से काले रंग का पानी आना, नाक के आसपास गालों पर सूजन, चेहरे में दर्द, चेहरे में सुन्नपन या सूजन आना, लगातार सिरदर्द, मुंह से बदबू, सीने में दर्द, आंखों में दर्द, आंखें लाल होना, खून की उल्टी होना आदि।