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गडकरी के हाईवे पर योगी ने चला दी चुनावी एक्सप्रेस, रालोद के गढ़ में किए ये बड़े ऐलान

Wed, 12 Sep 2018 03:41 PM IST
एम. रियाज़ हाशमी, अमर उजाला, मेरठ
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सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली-सहारनपुर फोरलेन हाईवे के बहाने भाजपा ने 2019 की चुनावी यात्रा शुरू कर दी है। दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाइवे 709-बी का शिलान्यास भर करके केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने 2019 में पार्टी के लिए दिल्ली का सियासी रास्ता पहले तैयार कर लिया है। फोरलेन 2020 में बनेगी, लेकिन देश में आम चुनाव 2019 में होना है इसलिए शिलान्यास के बहाने गंगा-यमुना के दोआब में सरकारी सौगात उम्मीद के मुताबिक बरसी। किसानों और नौजवानों को ध्यान में रखकर भाजपा ने संभावित विपक्षी महागठबंधन की राह भी रोकनी शुरू कर दी और साफ कर दिया कि चौ. अजित सिंह को उनके घर में ही घेरने की मंशा है। 

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जिस कैराना उपचुनाव से तीन महीने पहले राष्ट्रीय लोकदल शून्य से गिनती में आया वह इसी फोरलेन के केंद्र में है। 2008 में इसे फोरलेन बनाने की शुरूआत मायावती ने की थी, लेकिन काम पूरा अखिलेश यादव भी नहीं करा पाए। तब यह स्टेट के अधीन दिल्ली से बादशाही बाग (सहारनपुर) तक बननी थी। गडकरी ने इसे एनएच बनाने के लिए अखिलेश यादव से एनओसी मांगी थी, लेकिन दी आदित्यनाथ योगी ने। अजित सिंह भी केंद्र में मंत्री रहते हुए इस पर राजनीति के सिवाय कुछ नहीं कर सके। केंद्र के सामने विपक्ष का सवाल था कि इसे दिल्ली से सिर्फ सहारनपुर शहर तक ही एनएच क्यों घोषित किया? गडकरी ने सिद्धपीठ शाकंभरी देवी तक विस्तार की घोषणा करके विपक्ष को चित्त भी कर दिया और लाखों श्रद्धालुओं की राह भी आसान कर दी।

मंच पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सीएम योगी समेत अन्य भाजपा नेता - फोटो : अमर उजाला
यह चुनावी साल का ही ख्याल है कि बागपत में यमुना के लिए 100 और सहारनपुर में हिंडन नदी की सफाई के लिए 70 करोड़ रुपये की घोषणा की गई। यहां खादर में खेतों की सिंचाई यमुना और इसकी सहायक नदियों पर निर्भर करती है। सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली हिंडन मर चुकी है और गाजियाबाद तक किनारों पर बसे गांवों में बीमारियां और मौत बांट रही है। हिंडन लगातार आंदोलन और चुनावी मुद्दा बन रही थी। सहारनपुर में यूनिवर्सिटी की मांग भी पिछले दो लोकसभा चुनाव से मुद्दा है और भाजपा सांसद राघव लखनपाल शर्मा का यह चुनावी वायदा भी था। 

हालांकि गडकरी ने गन्ना किसानों के साथ शुगर इंडस्ट्री के प्रति भी अपनी चिंता जाहिर की लेकिन ‘शुगर बाउल’ में गन्ने के बजाए दूसरी वैकल्पिक फसलों की सलाह देकर उन्होंने और मुख्यमंत्री ने चौंकाया। सीएम ने 15 अक्टूबर तक निजी चीनी मिलों को बकाया न चुकाने पर कार्रवाई की चेतावनी देकर किसानों को भरोसा तो दिया लेकिन आसन्न पेराई सत्र को लेकर चीनी मिलों की हीला हवाली पर वे सरकार का रुख साफ न कर सके।
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सियासी नजरिए से बागपत जिला चौ. अजित सिंह और सहारनपुर जिला मायावती के गढ़ रहे हैं। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ये किले भाजपा ने ढहा दिए थे। यहां सहानुभूति या एंटी इनकमबैंसी फैक्टर को भाजपा जिंदा नहीं होने देना चाहती है। और इसके लिए सबसे आसान तरीका है उन वायदों और कामों को पूरा करना, जिन्हें पॉवर में रहकर भी ये दिग्गज नहीं कर पाए। 

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की इस घोषणा ने कमी पूरी कर दी कि सूबे की सड़कें महापुरूषों और दिवंगत नेताओं के नाम पर बनेंगी। इनमें अजित सिंह के पिता चौ. चरण सिंह भी हैं और बसपा के संस्थापक कांशीराम और तमाम प्रेरक महापुरूष भी। जाहिर है कि इस सड़क के निर्माण से पहले भाजपा दिल्ली की सियासी राह पर फर्राटा भरना चाहती है और इस चुनावी यात्रा पर किसान और नौजवान को साधते हुए योगी चल पड़े हैं।

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