भाजपा में जिला और महानगर अध्यक्ष पद बहुत अहम होता है। यही कारण है कि इसके लिए पूरी जोर आजमाइश होती है। पिछले चुनाव में करुणेश नंदन गर्ग को महानगर अध्यक्ष मनोनीत किया गया था, लेकिन बीच कार्यकाल में ही उन्हें हटाकर मुकेश सिंघल को महानगर अध्यक्ष बना दिया गया।
संगठन चुनाव का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के कारण अब नए सिरे से संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महानगर अध्यक्ष पद के लिए वैश्य बिरादरी से ही अध्यक्ष चुने जाने की चर्चा है, लेकिन पंजाबी या अनुसूचित जाति पर भी दांव खेला जा सकता है।
इसके चलते वैश्य बिरादरी से मुकेश सिंघल, जयकरण गुप्ता, विवेक रस्तोगी, करुणेश नंदन गर्ग, डॉ. वकुल रस्तोगी, संजीव गुप्ता और अजय गुप्ता नटराज, पंजाबी बिरादरी से हरिकांत अहलूवालिया, ब्राह्मण बिरादरी से वर्तमान महामंत्री कमल दत्त शर्मा, संजय त्रिपाठी और अनुसूचित जाति से पूर्व महानगर अध्यक्ष डॉ. चरण सिंह लिसाड़ी के नाम चर्चा में है।
दोबारा चुने जा सकते हैं सिंघल
वर्तमान महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल को संघ परिवार का करीबी माना जाता है। इस बार भी वह संघ के हस्तक्षेप से महानगर अध्यक्ष बने थे। उन्हें अध्यक्ष पद पर एक साल ही हुआ है, उनके दोबारा अध्यक्ष बनने की ज्यादा संभावनाएं भाजपाई जता रहे हैं।
चल रही लामबंदी
महानगर अध्यक्ष पद को लेकर बड़े नेताओं में खेमाबंदी चल रही है। मंडल अध्यक्षों को लेकर भी यह खेमाबंदी हावी नजर आई। महानगर अध्यक्ष पद को लेकर सांसद खेमा अलग है तो कैंट विधायक और दक्षिण विधायक की खेमाबंदी अलग चल रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी इन सबसे अलग हैं। हर दावेदार अपने आकाओं के जरिये महानगर अध्यक्ष पद को पाने की होड़ में लगा है।