नए मरीजों का पंजीकरण बंद
अब इस हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक में नए मरीजों का पंजीकरण बंद कर दिया गया है। सिर्फ पुराने मरीजों का इलाज चल रहा है। इनके अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया गया है। अभी तक डॉक्टर्स विद्आउट बॉर्डर की टीम मरीजों का निशुल्क इलाज कर रही है। जिसके बाद यह टीम यहां से चली जाएगी। पंजीकरण बंद किए जाने से मरीज परेशान हो रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय करेगा टेकओवर
इस क्लीनिक को स्वास्थ्य मंत्रालय टेकओवर करेगा, तो ही इसे फिर से शुरू किया जा सकेगा। मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में इसका बड़ा केंद्र बनाए जाने की बात चल रही है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी क्लीनिक की शुरुआत 25 जनवरी 2017 में हुई थी। इस क्लीनिक में तीन डॉक्टर, तीन नर्स, तीन काउंसलर, दो लैब टेक्नीशियन समेत 25 लोगों का स्टाफ है।
जिला अस्पताल के कमरा नंबर 17 में चल रहे इस क्लीनिक के इंचार्ज डॉ. हेमंत ने बताया कि इन गांवों के अलावा अन्य गांवों में भी यह अभियान चलाया जाएगा। ऐसे बहुत मरीज हैं जो क्लीनिक तक नहीं पहुंच पाए होंगे। जो स्टडी की गई है, वह उन मरीजों की है जो इलाज के लिए जिला अस्पताल आए थे।
यह है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस-सी को काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस-सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है।
हेपेटाइटिस सी के मरीज दो प्रकार केहोते हैं, एक वह हैं जिनमें पूरी तरह से वायरस फैल चुका है, उन्हें हेपेटाइटिस का मरीज माना जाता है, दूसरे ऐसे होते हैं जिनकेब्लड में हेपेटाइटिस के वायरस होते हैं, लेकिन आसानी से लक्षण का पता नहीं चल पाता है। इन्हें हेपेटाइटिस कैरियर कहा जाता है। इन्हें हेपेटाइटिस की दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन इनका ब्लड दूसरे व्यक्ति को चढ़ाने पर यह वायरस तेजी से इंफेक्शन करता है।
ऐसे करें रोकथाम
- नई सुई और सिरिंज इस्तेमाल करें।
- रेजर, ब्लेड या अन्य धारदार निजी सामानों की साझेदारी न करें।
- टैटू गुदवाने या नाक-कान छिदवाने में हमेशा नई सूई का इस्तेमाल करें।
- दूसरे लोगों के खून संपर्क में आने से बचें, संपर्क होने की दशा में साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं।