बिसाहड़ा कांड की महापंचायत और शोरगुल पर गर्माई सियासत ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। पुलिस अपराधियों को छोड़कर इन मामलों को संभालने के लिए रात दिन प्लानिंग कर रही है। महापंचायत में मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर समेत कई जनपदों की भीड़ बिसाहड़ा पहुंचने की आशंका है। खुफिया विभाग द्वारा भेजी रिपोर्ट ने शासन में भी खलबली मचा दी है।
बिसाहड़ा कांड को लेकर सोमवार को महापंचायत का एलान हो चुका है। पंचायत में वेस्ट यूपी के जिलों से भीड़ आने का अंदेशा है, जोकि बवाल करा सकती है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बाद पुलिस प्रशासन ने नोएडा जाने वाले रास्ते सील करने की तैयारी कर ली है।
मेरठ जोन आईजी सुजीत पांडेय ने मेरठ, हापुड़, बागपत, मुजफ्फरनगर समेत कई जनपदों के कप्तानों को निर्देश जारी है कि महापंचायत में उनके जिलों से भीड़ नहीं पहुंचनी चाहिए। इसके अलावा नोएडा के बॉर्डर पर पुलिस, पीएसी का पहरा लगाया, ताकि बिसाहड़ा गांव में भीड़ न पहुंचे। इस मामले की पल पल की रिपोर्ट शासन मेरठ जोन पुलिस से पूछ रहा।
आगरा से आई गोमांस की रिपोर्ट के बाद विपक्ष की सियासत गर्मा गई है। लोग बिसाहड़ा के इकलाख के परिवार पर गोहत्या का केस दर्ज कराने चाहते हैं। पुलिस भी बीच का रास्ता तलाशने में लगी है। दूसरी ओर 24 जून को रिलीज होने वाली शोरगुल फिल्म भी पुलिस के लिये चुनौती बन गई है। कई सियासी नेताओं ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर वेस्ट यूपी में यह फिल्म रिलीज हुई तो बवाल कर देंगे। सीधी चेतावनी मिलने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा है।
केस तो दर्ज करना होगा
पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों में चर्चा है कि बिसाहड़ा कांड में गोकशी का केस तो दर्ज कराना ही पड़ेगा। आगरा से आई रिपोर्ट के आधार पर गोहत्या का केस तो बनता है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर बली का बकरा कौन बनेगा। पुलिस और प्रशासन अधिकारी के मंसूबे है कोर्ट के आदेश पर पुलिस गोहत्या का केस दर्ज कर ले और मामला शांत हो जाए। कुछ लोग का इरादा है कि पुलिस सीधी रिपोर्ट दर्ज करे।