एसपी उमेश कुमार सिंह के मुताबिक 25 मार्च को बढ़ापुर में आरक्षित वन क्षेत्र कक्ष नंबर 11 के पास हाथी की हत्या कर दी गई थी। हाथी का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। बढ़ापुर के रामजीवाला क्षेत्र के वन रक्षक अमित बडोला की ने इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस घटना के खुलासे के लिए एसटीएफ समेत कई टीम लगी थीं। पर हाथी की हत्या का पता नहीं लग पाया था। एसपी ने बढ़ापुर पुलिस को इस घटना का खुलासा करने के कड़े निर्देश दिए थे।
पुलिस ने बढ़ापुर के गांव रामजीवाला निवासी मोहम्मद असलम, विसारत, शौकत, नासिर को दबोचकर गजराज की हत्या का खुलासा कर दिया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पावर कटर व लाइसेंसी बंदूक भी बरामद कर ली। पकड़े गए लोगों ने पुलिस को बताया कि उनका हाथी की हत्या करने का कोई इरादा नहीं था। घटना की रात करीब आठ बजे हाथी फसल खाने के लिए गांव की ओर आ गया। गांव वाले इकट्ठा होकर चले गए।
मोहम्मद असलम ने लाइसेंसी बंदूक से हाथी पर गोली चला दी। कुछ दूरी पर हाथी गिर गया। यह देखकर गांव वालों के हाथ पांव फूल गए। उन्होंने हाथी के शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। विसारत की आरा मशीन है। वहां से पावर कटर मंगाया गया। गांव के तमाम लोग इकट्ठा हुए और कटर से हाथी के शव के कई टुकड़े करके कुछ हिस्सों को जमीन में दबा दिया व कुछ को नदी के पास डाल दिया। तमाम टुकड़े नदी के पानी में बह गए।
गांव वालों ने सोचा कि हाथी की मौत पैर में गोली लगने से हुई जबकि गोली हाथी की आंख में लगी थी। हाथी युवा था। इसके बाद गांव वालों ने इस राज को अपने अंदर ही दफन किए रखा। किसी को कुछ नहीं बताया। पुलिस, एसटीएफ व वन विभाग की तमाम कोशिशें नाकाम साबित होती रहीं।
पुलिस की मानें तो गांव वालों ने हाथी के 14-15 टुकड़े किए थे। सभी टुकड़ों पर अलग अलग कर हिस्से में फेंक दिया था। कुछ टुकड़े जमीन में दबा दिए गए। असलम के नाम लाइसेंसी बंदूक है। असलम के बंदूक के लाइसेंस के निरस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हो गई है। बिसारत की आरा मशीन पर भी गाज गिरेगी। पुलिस के मुताबिक हाथी की हत्या के दौरान तमाम लोग लाठी डंडा लेकर भी तैयार थे।
कुछ घंटों में लगा दिया शव ठिकाने
रात के आठ बजे हाथी की हत्या की और सुबह छह बजे तक उसके शव के टुकड़े कर ठिकाने लगा दिए गए। इस काम में दस-बारह लोग शामिल रहे। बाकी लोगों की तलाश में भी पुलिस जुटी है।
एक रहते हैं गांव वाले
रामजीवाला गांव में अगर कोई घटना हो जाए तो गांववालों से उगलवाना टेढ़ी खीर है। गांव के लोगों में आपस में बहुत एकता है। कोई भी किसी की बात को बाहर नहीं पहुंचाता। सभी एक रहकर काम करते हैं। इस गांव में किसी जमाने में हरियाणा से कुछ लोग आकर बसे थे। एक ही परिवार पूरे गांव में फैला हुआ है। हर छोटी से बड़ी बात पर एकजुट रहते हैं। हाथी की हत्या के राज को भी ये लोग इस कारण ही छिपाए रहे। ग्राम प्रधान की चुनाव की रंजिश न होती तो हाथी की हत्या की बात भी बाहर निकलकर नहीं आती।
हाथी की हत्या के मामले में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल को बंद कर दिया था। कोई भी हाथी की हत्या के खुलासे की ओर नहीं देख रहा था। एसपी की सख्ती के बाद पुलिस सक्रिय हुई और वन विभाग की टीम को लेकर इस काम में जुट गई। पुलिस के साथ कोटिया, बढ़ापुर व सुआवाला के वन रेंजर की भी हत्यारोपी को पकड़वाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
हथिनी को मारा था
पुलिस के मुताबिक गांव वालों ने हथिनी को मारा था। हथिनी के दांत नहीं होते हैं। पुलिस शुरू में मान रही थी कि हाथी के दांत की तस्करी के लिए हत्या की गई है।
मेरठ में बनी खुलासे की योजना
मेरठ में पिछले दिनों हुई वन विभाग के अफसरों की बैठक में हाथी की हत्या को खोलने का ताना बाना बुना गया था। यह मामला बैठक में उठा था। इसके बाद विभाग के अफसर हरकत में आए। पुलिस का भी सहयोग लिया गया। तब जाकर एसपी ने इस केस में फाइनल रिपोर्ट को पुनर्विवेचना के निर्देश दिए थे।