18 अक्तूबर डूब गई थी नाव
पुल की अप्रोच बहने से राहगीरों ने नाव को यातायात का माध्यम बना लिया था, लेकिन 18 अक्तूबर को नाव के डूबने के कारण वह भी बंद कर दी गई। नाव बंद होने के बाद पुल के निकटवर्ती गांवों के किसानों व कर्मचारियों को 10-20 किलोमीटर के सफर को बिजनौर बैराज से होकर करीब 100 किलोमीटर चलकर पूरा करना पड़ रहा है।
किसानों, मजदूरों व कर्मचारियों की परेशानी को देखते हुए हस्तिनापुर गंगा पुल के निकट रहने वाले पुजारी सतीशनाथ, दुकानदार कुलदीप सिंह आदि ने एक बड़ी सीढ़ी बनवाकर पुल पर चढ़ने उतरने के लिए लगा दी। अब इसी सीढ़ी के सहारे सैकड़ों किसान, मजदूर व कर्मचारी रोजाना इधर-उधर आ जा रहे हैं।
गंगा के रेत से धार रोकने का प्रयास
हस्तिनापुर गंगा पुल के निकट पानी में बही सड़क को फिर से बनाने का काम चींटी की चाल चल रहा है। बृहस्पतिवार को एक पोर्कलेन मशीन से गंगा के रेत का बंधा लगाकर पानी की धार को रोकने की कोशिश की जा रही थी। शुक्रवार को जमीन दलदली बताकर पोर्कलेन चालक ने काम नहीं किया।