वहीं जिलाध्यक्ष विरेंद्र सिंह ने कहा कि मिल अधिकारी किसानों के गन्ने का भुगतान न कर उनका आर्थिक शोषण करने में लगे हैं। किसानों का शोषण कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आक्रोशित किसान नरेंद्र ठाकुर, जोगेंद्र सिंह, युवराज सिंह, महाश्य घनश्याम सिंह, युवराज सिंह, जोगेंद्र सिंह मिल की चलती चैन में कूद गए। इससे मिल परिसर में हड़कंप मच गया। धरने में मौजूद किसानों का शोर सुनकर मिल कर्मचारियों ने चेन बंद की और उन्हें बाहर निकलवाया। किसानों ने मिल में पेराई बंद करा दी।
इसके बाद मौके पर पहुंचे गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह को किसानों ने बंधक बना कर धरने में अपने बीच बैठा लिया। आक्रोशित किसानों ने मिलकर गेट के कांटो पर गन्ने की ढुलाई बंद करा दी। मिल अधिकारियों ने सूचना आला अफसरों को दी। बाद में मिल अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर गत वर्ष के गन्ने का बकाया भुगतान दस जनवरी तक कराने व चालू सत्र के गन्ने का भुगतान 11 जनवरी से शुरू कराए जाने का किसानों को आश्वासन दिया।
बता दें कि धरने की अध्यक्षता मूला सिंह फौजी व संचालन बिट्टू चौधरी ने किया। धरने में मास्टर गिरिराज सिंह, हाजी शकील अहमद, जितेंद्र सिंह, धर्मेंद्र कुमार, राजपाल भगत, जयपाल सिंह, महाशय घनश्याम सिंह, कैलाश शर्मा, कौशल कुमार, रजनीश कुमार, मुन्ना लाल शर्मा, नरेंद्र सिंह, अंकुर चौधरी, यामीन, मनोज कुमार, रोहित, श्रीधर आदि किसान मौजूद रहे। किसानों ने हंगामे के कारण करीब आठ घंटे मिल बंद रही। बाद में पेराई शुरू की गई।
भुगतान के बदले ले चीनी
चीनी मिल अधिकारियों ने जरूरतमंद किसानों के लिए भुगतान का नया फार्मूला निकाला। गन्ना महाप्रबंधक परोपकार सिंह ने बताया कि जरूरतमंद किसान अपने भुगतान की रकम के बराबर मिल से चीनी ले सकते हैं। किसान बाजार में चीनी बेचकर अपना खर्च पूरा कर सकते हैं। परोपकार सिंह के अनुसार ऐसे किसानों को संबंधित दस्तावेज मिल अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
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