हत्यारोपी माफिया को समाज ने कराया था माफ
साल 1989 में धनेंद्र जैन पर बागपत के एक कस्बे में अपने भाई और रिश्तेदार के साथ दिनदहाड़े एक भाजपा नेता की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा था। इसमें तीनों जेल से करीब छह माह बाद जमानत पर छूटे थे। घटना के करीब आठ साल बाद समाज के गणमान्य लोगों द्वारा फैसला कराने के बाद तेल माफिया हत्या के आरोप से मुक्त हो गया था।
पड़ चुकी डकैती
पुलिस के अनुसार तेल कारोबारी धनेंद्र के यहां 6-7 साल पहले करोड़ों रुपये की डकैती पड़ी थी। तेल कारोबारी ने डकैती में भदौड़ा गैंग के शामिल होने और जान का खतरा होना बताकर सरकारी सुरक्षा ली थी।
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दबाव में मिले गनर
तेल कारोबारी को पुलिस के एक प्रदेश स्तरीय आला अधिकारी (अब सेवानिवृत्त) का पूरा संरक्षण प्राप्त था। इस समय भी वह इसकी मदद कर रहे हैं। उन्हीं अधिकारी के दबाव में तेल माफिया को मेरठ और बागपत दोनों जिलों से न केवल गनर मिले, बल्कि तेल के काले कारोबार को भी पुलिस संरक्षण देती रही।
बागपत से कैसे लिया गनर
बड़ा सवाल ये है कि ये तेल कारोबारी वर्षों पहले बागपत में रहता था। लेकिन लंबे समय से मेरठ में स्थायी निवास है। इसके बावजूद दो जिलों से गनर लेना चौंकाने के साथ पुलिस-प्रशासन पर पकड़ को भी दर्शा रहा है। बागपत पुलिस के अनुसार धनेंद्र ने आवेदन में कहा था कि वह रोजाना बागपत के एक कस्बे में आता-जाता है। सुरक्षा को खतरा है। यहां पर उसका पुराना आवास है, इसलिए सुरक्षा दी जाए।
सवाल ये उठता है कि जब मेरठ पुलिस गनर दे चुकी है तो बागपत पुलिस ने गनर कैसे दे दिया। तीन-तीन गनर साथ लेकर चलने वाले इस तेल माफिया पर आज तक पुलिस की नजर क्यों नहीं पड़ी। जांच क्यों नहीं कराई। बड़ा सवाल ये भी है कि क्या हत्या के आरोपी को सरकारी सुरक्षा दी जा सकती है।
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रात को वापस लिया गनर
डीएम अनिल ढींगरा ने सीओ एलआईयू से गनर प्रकरण में जानकारी की, तो बताया गया कि तेल कारोबारी धनेंद्र जैन के पास शासन के निर्देश पर मेरठ से एक गनर है, जबकि दूसरा बागपत से है। कारोबारी की पत्नी कल्पना जैन को जिला समिति से एक गनर अलग से मिला है।
पहले भी हो चुका खेल
माफियाओं और बदमाशों को सरकारी सुरक्षा देने का यह पहला मामला नहीं है। तीन माह पहले कुख्यात भूपेंद्र बाफर का मामला सामने आ चुका है। जिसमें जानी थाना पुलिस ने बाफर का तमाम आपराधिक इतिहास छिपाते हुए रिपोर्ट जारी की।
उसी रिपोर्ट पर एलआईयू और तत्कालीन एसएसपी ने भी संस्तुति कर डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति (जिसमें एसएसपी भी होते हैं) से भूपेंद्र बाफर को एक नहीं बल्कि दो सरकारी गनर उपलब्ध करा दिए।
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मैंने नहीं दिया गनर
एसआईटी साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई कर रही है। आरआई ने जिला समिति के निर्देश पर तेल कारोबारी व उसकी पत्नी को 1-1 गनर देना बताया। मैंने अपने कार्यकाल में किसी को भी गनर नहीं दिया। -
अजय साहनी, एसएसपी
शासन को भेजी रिपोर्ट
कारोबारी धनेंद्र जैन की पत्नी कल्पना जैन को जिला समिति से दिया सरकारी गनर तत्काल प्रभाव से वापस लेने के आदेश दिए हैं। धनेंद्र जैन को शासन स्तर से मिले गनर की रिपोर्ट भेज दी गई है।
-अनिल ढींगरा, डीएम