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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर का भाजपा पर हमला, बोले- '2019 में गठबंधन को करेंगे समर्थन'

Sun, 13 Jan 2019 10:34 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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शिक्षक सम्मान समारोह में बोलते हुए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर - फोटो : अमर उजाला
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भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर आजाद ने खुद के चुनावी राजनीति में उतरने से इंकार किया लेकिन भाजपा को  हराने के लिए गठबंधन का  साथ देने की बात कही। उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव संविधान विरोधी और संविधान समर्थकों के बीच है। 
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कमंडल को सिर्फ मंडल से ही रोका जा सकता है। अब यह गठबंधन बन गया है तो दिलों का गठबंधन बने। जिस दिन सत्ता बहुजन लोगों के हाथ में आ जाएगी, गरीबों को पांच-पांच बीघा जमीन के पट्टे दिलवाए जाएंगे।  

वह रविवार को सहारनपुर में देहरादून रोड स्थित संत रविदास छात्रावास के मैदान में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 1993 में वैचारिक गठबंधन हुआ था, लेकिन इस बार समाज की जरूरत है। 
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अनुसूचित जाति- जनजाति, अल्पसंख्यक विरोधी भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए ही गठबंधन को समर्थन करेंगे। उन्हें कोई पार्टी टिकट भी दे तो भी वह राजनीति में नहीं आना चाहते हैं, लेकिन भाजपा को उखाड़ने के लिए गठबंधन को समर्थन करेंगे।

चंद्रशेखर ने कहा कि संविधान को चाहने वालों को सरकार कुचलना चाहती है,  लेकिन डायरी हमने भी बना ली है। उन्हें एक-एक गाली, एक एक लाठी याद है। जिस दिन सत्ता हमारे हाथ आएगी तो जवाब दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि भीम आर्मी के युवा भारत बंद करना भी जानते हैं और भारत चलाना भी जानते हैं। उन्होंने कहा कि 85 प्रतिशत लोगों पर 15 प्रतिशत लोग राज कर रहे हैं, अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। 

उन्होंने सवर्णों को आरक्षण दिए जाने को भी गलत बताया। कहा इन्हें मात्र दो दिन में ही आरक्षण दे दिया, जबकि ओबीसी (जाट-गुर्जरों) को लंबा आंदोलन करना पड़ा था। देश में 85 प्रतिशत एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज, शोषित समाज है। 

ढाई लाख पर टैक्स लगता है, लेकिन आठ लाख कमाने वाले को गरीब मान लिया गया। उन्होंने कहा कि 86 फीसदी नौकरियों में, 96 फीसदी व्यापार में, 78 प्रतिशत शिक्षा के क्षेत्र में, 94 फीसदी भूमि धारी और 70 प्रतिशत राजनीति में सवर्ण ही हैं। 

फिर भी उन्हें आरक्षण दे दिया। इन्हें मुस्लिम, अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग से कोई लेना देना नहीं है। मुख्यमंत्री का नाम लिए बगैर चंद्रशेखर ने कहा कि प्रदेश के मुखिया ट्वीट कर कहते हैं कि उनके दो साल के शासन में कोई भी दंगा नहीं हुआ, जबकि उन पर ही दंगे समेत 23 मुकदमे दर्ज हैं। 

चंद्रशेखर ने कहा कि जिन सांसदों ने सवर्णों का आरक्षण पारित करने में सहमति जताई उनका विरोध करना होगा। उन्होंने कहा कि देश को झूठ बोलने वाला प्रधानमंत्री नहीं चाहिए। बहुजन समाज में ऐसे कई मजबूत नेता हैं जो सरकार चलाना जानते हैं और बिना दंगे के सरकार पांच साल पूरा करना भी जानते हैं।  

चार 'अ' को जोड़ना है        
चंद्रशेखर ने कहा कि उन्हें कई बार प्रलोभन दिया गया, लेकिन ऐसा नोट नहीं बना जो खरीद सके। जो 42 लोग जेल होकर आए हैं, उन्हें दोबारा जेल नहीं जाने देंगे। उन्होंने कहा कि हम संघर्षों के आदी हैं, हम आंबेडकरवादी हैं। 

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार असमानता, अन्याय, अपमान, अशिक्षा में उलझाना चाहती है, लेकिन भीम आर्मी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को एकजुट कर चारों अ को जोड़ना चाहती है। कार्यकर्ताओं से भीम आर्मी के लिए एक-एक रुपया प्रतिघर से देने की बात भी कही।

 मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की मांग उठी

कार्यक्रम में मुरादनगर के पूर्व विधायक वहाब चौधरी के भाई निजाम चौधरी ने कहा कि सहारनपुर से उठी चिंगारी देश के कोने-कोने में पहुंच चुकी है। आज तक अनुसूचित जाति का कोई प्रधानमंत्री नहीं बना है। इस बार बहन मायावती को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा। 

भीम आर्मी भी चाहती है अनुसूचित वर्ग का प्रधानमंत्री बने। बिजनौर के पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी ने कहा कि 85 फीसदी जनता पर बाबा साहब का अहसान है। उनके बाद कांशीराम ने लाठी लेकर चलने की हिम्मत बख्शी। अब चंद्रशेखर नया रास्ता दिखा रहे हैं। चंद्रशेखर जैसा व्यक्ति 100 साल तक कोई नहीं होगा।

260 शिक्षकों को किया सम्मानित      
शिक्षक सम्मान समारोह में भीम आर्मी की 350 पाठशालाओं के 260 शिक्षकों को सम्मानित किया। पाठशाला लबकरी की छात्रा रिया ने कहा कि देश में आंबेडकरवाद लाकर रहेंगे। 

भीम आर्मी पाठशाला काशीपुर की छात्रा तान्या ने कहा कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे संविधान को पहचान रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन भीम आर्मी जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया ने किया। इस मौके पर परविंद्र भाटी, दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती अहमद, प्रोफेसर महेंद्र, भीम आर्मी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मंजीत सिंह नोटियाल समेत अनेक लोग शामिल रहे।    
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विवादित नारे लगे, बोल भी बिगड़े

कार्यक्रम के दौरान भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर के बोल भी बिगड़ गए। उन्होंने विवादित और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया।

नोटिस देने पर विचार कर रही पुलिस
भीम आर्मी के कार्यक्रम को लेकर पुलिस की तरफ से नोटिस देने पर विचार चल रहा है। नोटिस की वजह से कई बिंदु माने जा रहे हैं, जिसमें कार्यक्रम के लिए 12 से 2 बजे तक की अनुमति ली गई थी, जबकि कार्यक्रम 4 बजे तक चला। 

इसके अलावा 400 कार्यकर्ताओं के आने की बात कही थी, लेकिन एक हजार से ज्यादा पहुंचे। मार्ग अवरुद्ध नहीं होने की बात कही थी, लेकिन मार्ग अवरुद्ध हुआ। वहीं, हॉस्टल के छात्रों को दिक्कत नहीं होने देने की बात कही थी, लेकिन लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण किया गया। 

शिक्षक सम्मान समारोह बताया था, लेकिन मंच से राजनीतिक बातें भी कहीं गई। इन सभी बिंदुओं को लेकर पुलिस की तरफ से भीम आर्मी को नोटिस देने पर विचार चल रहा है। वहीं, विवादित नारे और बोल को लेकर अभी पुलिस जानकारी से इंकार कर रही है। 
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