स्वास्थ्य विभाग में भर्ती से पहले ही सेंधमारी शुरू हो गई है। एएनएम, स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट और डॉक्टरों के पदों पर भर्ती के लिए विभाग ने केवल मेरठ में विज्ञापन निकाला था, लेकिन आवेदन प्रदेश के पूर्वी जिलों से भी आए हैं। सबसे अधिक आवेदन मऊ और आजमगढ़ से आए हैं। इससे सवाल खड़े होने लगे हैं। तमाम आवेदन ऐसे हैं जो नियम विरुद्ध मिले हैं और अधिकारियों ने उन्हें भी स्वीकार कर लिया है। ऐसे में अंदेशा सेटिंग का है।
डॉक्टर के छह, फार्मासिस्ट 16, स्टाफ नर्स 4 और एएनएम के 125 पदों पर स्वास्थ्य विभाग ने आवेदन मांगे थे। विभाग ने आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून निर्धारित की थी। अकेले एएनएम पद पर 630 आवेदन आए हैं। मऊ और आजमगढ़ से करीब 255 आवेदन मिले हैं। सूत्रों का दावा है कि अधिकांश आवेदन कोरियर के माध्यम से आए हैं। विभाग ने उन्हें स्वीकार कर लिया है। कुछ आवेदनों को सीधे भी जमा कराया गया है, जबकि विज्ञापन की शर्तों में साफ किया गया था कि स्पीड पोस्ट या फिर पंजीकृत डाक के माध्यम से आने वाले आवेदन की स्वीकार किए जाएंगे। मऊ और आजमगढ़ जिले से आने वाले अधिकांश आवेदन 15 जून के बाद आए हैं। करीब 45 आवेदन अंतिम तिथि को स्वीकार किए गए हैं। सभी कोरियर के माध्यम से कार्यालय को प्राप्त हुए हैं। विज्ञापन की शर्तों के हिसाब से उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता था।
बड़े रैकेट का अंदेशा
पिछले साल हापुड़, गाजियाबाद और अन्य कुछ जिलों में हुई भर्तियों के दौरान मऊ और आजमगढ़ से जमकर आवेदन आए थे। इनमें से कई को नौकरी भी मिल गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश के दो खास जिलों से आवेदन आने और चयनित होने पर सवाल खड़े हुए थे। आरोप यहां तक भी लगे थे कि रैकेट के जरिये दोनों जिलों से अभ्यर्थियों को लाया गया और फिर स्थानीय स्तर पर सेटिंग होने के बाद उन्हें नौकरी दिलाई गई। अब कुछ ऐसा ही मेरठ में भी होता दिखाई दे रहा है। क्योंकि एकाएक सीएमओ कार्यालय में भी हलचल बढ़ गई है। खास लोगों से बंद कमरे में मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है।
कई लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में
दो जिलों से आवेदन आने पर पूरा सिस्टम संदेह के घेरे में है। सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी पूर्व के जिलों के संपर्क में रहे हैं, जिस कारण से हो सकता है कि उस रैकेट से संपर्क बन गया हो जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अभ्यर्थियों को लाकर भर्ती कराता है।
तबादले से पहले भर्ती की कवायद
भर्ती कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग में फाइलों को पूरा करने की होड़ मची है, ताकि डीएम जल्द साक्षात्कार की तिथि घोषित कर दें। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के कई आलाधिकारियों का स्थानांतरण होना है। नयी स्थानांतरण नीति के हिसाब से मंडल में 10 साल और जिले में 6 साल पूरे करने वाले अधिकारियों का तबादला होगा। कई अधिकारी ऐसे है जिन्हें 16 से अधिक साल मंडल में हो चुके हैं। उनका जाना तय है।