संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सगुण और निर्गुण परम्परा के भजन गायक पद्मश्री भारती बंधु ने युवाओं को शास्त्रीय संगीत के साथ ही कबीर की साखी से जुड़ने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कबीर के भजनों के माध्यम से वह पूरे विश्व के युवाओं को एक संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। कहा कि आज के दौर में युवाओं को पाठ्यक्रम में कबीरवाणी और शास्त्रीय संगीत से जोड़ने की जरूरत है। कबीर वाणी और शास्त्रीय संगीत दोनों ही युवाओं हो तनावमुक्त रखते हैं।
2013 में पद्मश्री से सम्मानित भारती बंधु कहते हैं कि कबीर की एक साखी है ‘देश बिगाडे़ तीन, कायर, कपटी और क्रूर। देश बचाए तीन संत, सती और सूर।’ युवाओं की जो शूरता है वह उनके समाज और देश को महान बनाती है। संस्कृति को महान बनाने के लिए कबीर का अध्ययन जरूरी है। कबीर के एक भजन के हवाले से वे कहते हैं कि चार जने मिल अर्थी उठाई, बांधी कांठ की डोली, ले जाके मरघट में धर दई, फूंक दिए जस होली। भारती बंधु का कहना है कि मां की कोख से कब्र का रास्ता दूर नहीं होता हैं, लेकिन कभी-कभी चलते-चलते एक सदी लग जाती है। कई बार सब कुछ पलभर में ही खाक हो जाता है। जब सबको धूल और धुआं बनकर ही उड़ जाना है तो फिर अंतिम सत्य से मुंह क्यों चुराना?
किराना घराने की परंपरा के हैं भारती बंधु
भारती बंधु ने कैराना के किराना घराना और रायपुर के हाजी ईद अली से संगीत की तालीम हासिल की। किराना घराना के प्रतिष्ठित संगीतज्ञ उस्ताद आशिक अली खान इनके उस्ताद हैं। भारती बंधु कहते हैं कि मेरठ से उनका विशेष नाता रहा है। वह आज जो भी हैं किराना घराने की बदौलत हैं। कमर जलालवी के एक शेर के हवाले से भारती बंधु बोले कि दबा के कब्र पर सब चल देंगे एक दिन फिर न दुआ होगी न सलाम। हम कहते रह जाएंगे-जरा सी देर में क्या हो गया जमाने को।