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मेरठ में 15 फीसदी ने छोड़ा बीएड एंट्रेंस  

Sat, 23 Apr 2016 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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बीएड एग्जाम देकर परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते अभ्यर्थी। - फोटो : अमर उजाला
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 बीएड सत्र 2016-18 के लिए शुक्रवार को संयुक्त प्रवेश परीक्षा हुई। मेरठ शहर में 64 केंद्रों पर दो पालियों में परीक्षा हुई। जाम की वजह से परीक्षार्थियों और आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई की परीक्षा छूट गई। फोटो और सिग्नेचर का मिलान नहीं होने की समस्या भी आई, लेकिन अंडर टेकिंग लेने के बाद सबको पेपर देने की इजाजत दे दी गई। करीब 15 प्रतिशत परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ी। पेपर तो आसान रहा, लेकिन गर्मी ने पसीने छुड़ाए।
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मेरठ में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली और मेरठ के छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। बाकी जिलों की परीक्षा के लिए गाजियाबाद में सेंटर बनाए गए थे। मेरठ में 64 केंद्रों पर 32105 परीक्षार्थी थे। सुबह की पाली में 4624 और शाम को 4550 परीक्षार्थी गैर हाजिर रहे। शाम की पाली में 27555 ने परीक्षा दी। 85 फीसदी ने परीक्षा दी जबकि 15 फीसदी ने छोड़ दी। उधर, गाजियाबाद में 22 सेंटरों पर 11354 परीक्षार्थी थे। सुबह की पाली में 95791 ने परीक्षा दी। 1775 गैर हाजिर रहे। सुबह की पाली आठ से 11 और शाम की एक से चार बजे तक चली।

केंद्रों पर पहुंचने के लिए परीक्षार्थियों को जाम का सामना करना पड़ा। बहुतों की लेट होने की वजह से परीक्षा छूट गई। कंकरखेड़ा में फ्लाईओवर पर जाम लगने की वजह से काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। पेपर तो आसान रहा लेकिन गर्मी ने पसीने छुड़ाए। दोनों पालियों के बीच करीब दो घंटे का अंतर था। यह इंतजार करने के लिए परीक्षार्थी और उनके साथ आए परिजन छांव की तलाश में रहे।
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ऐसे केंद्र जो बाजार के बीच थे, वहां परेशानी ज्यादा हुई। केंद्रों पर एडमिट कार्ड में नाम और सिग्नेचर मैच नहीं करने की शिकायत आई। उसे अंडरटेकिंग लेने के बाद सबको इजाजत दे दी गई। नोडल अधिकारी सीसीएसयू के प्रतिकुलपति प्रो. एचएस सिंह का कहना है परीक्षा शांतिपूर्ण रही। एडमिट संबंधी जो शिकायत थी, उसके आवेदन लखनऊ विवि को भेज दिए जाएंगे। 

शामिल होना जरूरी, सीट पक्की 
बीएड एंट्रेंस में परीक्षार्थियों के लिए शामिल होना जरूरी था। जिसने परीक्षा दी उसका एडमिशन पक्का है। संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजक लखनऊ विवि की ओर से निर्देश था कि अगर परीक्षार्थी पहली पाली का पेपर नहीं देता और दूसरी में पहुंचता है तो उसे बैठाया जाए। कुछ ने पहली पाली का पेपर देने के बाद दूसरी पाली का छोड़ दिया। सीट से कम आवेदन हुए हैं, पिछली बार काफी कम रैंक वालों के भी दाखिले हो गए थे।
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