वहीं यूपी में मुजफ्फरनगर के बवाना गांव में जलनिकासी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों की पंचायत में सर्वसम्मति से आगामी लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। साथ ही पंचायत में सर्वसम्मति से बवाना गांव में बीजेपी नेताओं के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं तो वोट भी नहीं।
बुढ़ाना तहसील क्षेत्र के गांव बवाना में सोमवार को सुरेश पाल के घेर में ग्रामीणों की पंचायत हुई। पंचायत में गांव की गलियों में होने वाले जलभराव का मु्द्दा छाया रहा। पंचायत में कूडे़ सिंह ने कहा कि गांव में घरों से निकलने वाले और बरसात के पानी की निकासी नहीं है। गांव के तालाब का आकार छोटा होने के कारण उसमें पानी नहीं समाता। स्कूल में जाने वाले बच्चों व ग्रामीणों को पानी व कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। गांव में श्मशान घाट नहीं है। नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया जाता है। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों को नदी पर जाने के लिए कीचड़ व पानी से होकर गुजरना पड़ता है। मास्टर सुनील ने कहा कि बीजेपी के शासन में गांव की गलियों की गंदगी व पानी के निकासी की समस्या व गांव के संपर्क मार्गों की हालत खराब है।
आरोप है कि चुनाव से पहले किए जाने वाले वादे कोई पूरा नहीं करता। पंचायत में विनोद ने कहा कि गांव की इस समस्या को लेकर गांव वालों ने तहसील दिवस में भी अनेकों बार शिकायत भेजी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी वे कई बार मिल चुके हैं। पंचायत में सर्वसम्मति से आगामी लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। पंचायत में ग्रामीणों ने बीजेपी नेताओं के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने नारा दिया की गांव के पानी की निकासी नहीं तो वोट नहीं। गांव वालों ने पूरे गांव में दीवारों पर लिख दिया कि बीजेपी नेताओं का गांव में प्रवेश वर्जित है।
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