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किसानों का फूटा गुस्सा, भाजपा नेताओं का 'गांव में आना सख्त मना है' के लगाए बोर्ड

Mon, 08 Oct 2018 08:31 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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लाठीचार्ज को लेकर किसानों में रोष - फोटो : अमर उजाला
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यूपी बॉर्डर पर किसान क्रांति यात्रा के दौरान किसानों पर हुए लाठीचार्ज से किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। किसानों ने बास्टा क्षेत्र के गांवों में भाजपा वालों का किसान गांव में आना सख्त मना है का चेतावनी बोर्ड लगा दिया है। मामला यूपी के बिजनौर जिले का है।

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भाकियू की किसान क्रांति यात्रा के दौरान यूपी बॉर्डर पर पहुंचने पर प्रशासन ने किसानों को दिल्ली में घुसने नहीं दिया और निहत्थे किसानों पर पानी की बौछार, आंसू गैस के गोले छोड़े थे। यही नहीं बल्कि लाठीचार्ज भी किया था। इससे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। बास्टा क्षेत्र के गांव संसारपुर में किसान एकता मंच ने भाजपा के नेताओं का इस गांव में आना सख्त मना है जान माल की स्वयं रक्षा करें, गांव अहरौला में बीजेपी वालों का इस किसान गांव में आना सख्त मना है। निहत्थे किसानों पर लाठियां बरसाओगे और वोट मांगने भी हमारे ही गांव में आओगे का बोर्ड लगा दिया है। गांव वालों ने गांव में भाजपा के खिलाफ वॉल पेंटिग भी करा दी है। किसानों के विरोध से भाजपाइयों व प्रशासन में खलबली मच हुई है।

उधर, चांदपुर में किसान मजदूर संगठन गांव पृथ्वीपुर में महेंद्र सिंह के आवास पर हुई पंचायत में वक्ताओं ने किसान क्रांति यात्रा में सरकार द्वारा किसानों पर लाठीचार्ज की घोर निंदा की। पंचायत में वक्ताओं ने 28 नवंबर को दिल्ली में होने वाले किसान आंदोलन में अधिक से अधिक किसानों से पहुंचने की अपील की। मोहम्मद अख्तर अली की अध्यक्षता व सोमपाल सिंह के संचालन में हुई पंचायत में हरगुलाल सिंह, कर्मवीर सिंह, महेंद्र पाल शर्मा, विरेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह आदि मौजूद रहे।

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वहीं यूपी में मुजफ्फरनगर के बवाना गांव में जलनिकासी नहीं होने से नाराज ग्रामीणों की पंचायत में सर्वसम्मति से आगामी लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। साथ ही पंचायत में सर्वसम्मति से बवाना गांव में बीजेपी नेताओं के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में जलनिकासी की व्यवस्था नहीं तो वोट भी नहीं।  
       
बुढ़ाना तहसील क्षेत्र के गांव बवाना में सोमवार को सुरेश पाल के घेर में ग्रामीणों की पंचायत हुई। पंचायत में गांव की गलियों में होने वाले जलभराव का मु्द्दा छाया रहा। पंचायत में कूडे़ सिंह ने कहा कि गांव में घरों से निकलने वाले और बरसात के पानी की निकासी नहीं है। गांव के तालाब का आकार छोटा होने के कारण उसमें पानी नहीं समाता। स्कूल में जाने वाले बच्चों व ग्रामीणों को पानी व कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। गांव में श्मशान घाट नहीं है। नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया जाता है। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों को नदी पर जाने के लिए कीचड़ व पानी से होकर गुजरना पड़ता है। मास्टर सुनील ने कहा कि बीजेपी के शासन में गांव की गलियों की गंदगी व पानी के निकासी की समस्या व गांव के संपर्क मार्गों की हालत खराब है। 

आरोप है कि चुनाव से पहले किए जाने वाले वादे कोई पूरा नहीं करता। पंचायत में विनोद ने कहा कि गांव की इस समस्या को लेकर गांव वालों ने तहसील दिवस में भी अनेकों बार शिकायत भेजी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व  केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी वे कई बार मिल चुके हैं। पंचायत में सर्वसम्मति से आगामी लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया गया। पंचायत में ग्रामीणों ने बीजेपी नेताओं के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने नारा दिया की गांव के पानी की निकासी नहीं तो वोट नहीं। गांव वालों ने पूरे गांव में दीवारों पर लिख दिया कि बीजेपी नेताओं का गांव में प्रवेश वर्जित है।

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