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उपद्रव करने वाले 32 आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त, पुलिसकर्मियों पर किया था जमकर पथराव

Fri, 21 Feb 2020 12:49 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर

सार

सीएए के विरोध की आड़ में उपद्रव करने के 32 आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त हो गई है।
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बिजनौर उपद्रव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में सीएए के विरोध की आड़ में उपद्रव करने के 32 आरोपियों की जमानत याचिका निरस्त हो गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव पांडेय की अदालत ने जमानत याचिका निरस्त की है, जबकि चार आरोपियों की जमानत सशर्त मंजूर की गई है। 

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शासकीय अधिवक्ता संजीव वर्मा ने बताया कि 20 दिसंबर 2019 को बिजनौर में सीएए के विरोध में उपद्रव हुआ था। थाना कोतवाली शहर के एसआई हरीश कुमार की तरफ से दर्ज रिपोर्ट में बताया गया कि जावेद आफताब, परवेज आफताब, चेयरमैन शमशाद अंसारी, इमरान, दिलशाद अंसारी, राशिद, हाजी वारिस, शाह आलम आदि के नेतृत्व में भीड़ ने नारेबाजी के बाद तोड़फोड़, पथराव और वाहनों में आग लगाई गई। पुलिसकर्मियों पर फायरिंग के अलावा पेट्रोल से भरी बोतलें फेंकी गई थीं। कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 

पुलिस ने मौके से 33 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें रहीम, मोहम्मद इश्तियाक, मोहम्मद शुऐब, मोहसिन, कैफ, इनकिसाफ, मोबिन अहमद, शोएब, मोहम्मद हसन, अख्तर, मोहम्मद नदीम, आदिल, मोहम्मद नाजिर, सलमान, सारिक, शोएब, इंतजार, सिकंदर, शहनवाज, सुलेमान, शकील अहमद, साजिद, जमील, अंसार अहमद, मोहम्मद शारिक, मोहम्मद अजीम, मोहम्मद हामिद, सोहेल, हुमेर, मोहम्मद साइन और मोहम्मद खालिद आदि शामिल थे। आरोपियों से असलहे, डंडे आदि सामान बरामद हुआ था। इसके बाद चार और आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। मौके से गिरफ्तार 32 आरोपियों की तरफ से जमानत याचिका के पक्ष में दलील दी गई कि उन पर फर्जी बरामदगी दिखाई गई है। 
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शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि मौके से गिरफ्तार लोगों ने नारेबाजी, पथराव, तोड़फोड़, आगजनी, मारपीट और फायरिंग की है। 36 से ज्यादा वाहनों में तोड़फोड़ की गई। अदालत ने मौके से पकड़े गए सभी 32 आरोपियों का अपराध गंभीर प्रवृत्ति का मानते हुए जमानत याचिका निरस्त कर दी है। बाद में पकड़े गए चार आरोपियों मोहम्मद अजहर, सद्दाम, राशिद और महताब की जमानत याचिका सशर्त स्वीकार की गई। इन लोगों का कहना था कि एफआईआर में नामजद नहीं थे। इन्हें फंसाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इन्हें इस शर्त पर रिहा किया जाता है कि इस प्रवृत्ति का अपराध दोबारा नहीं करेंगे और विवेचना में सहयोग करते हुए हर तारीख पर कोर्ट में हाजिर होंगे।

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