मेरठ। फुटबॉल चौराहे से बाईपास तक जगह-जगह नाला निर्माण अधूरा होने के कारण बागपत रोड पर गंदा पानी भर रहा है। जलनिकासी की व्यवस्था न होने से बार-बार सड़क टूट रही है। हर तीन साल बाद सड़क की मरम्मत या उसके निर्माण पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी नाला निर्माण नहीं कराया जा रहा है। नगर निगम, एमडीए और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की नासमझी से सरकारी खजाने को चूना लग रहा है। साथ ही जनता को भी समस्या से जूझना पड़ रहा है।
बरसात के समय बागपत रोड पर भीषण जलभराव होता है। वजह सड़के के किनारे बने नालों पर अतिक्रमण है। इस कारण नालों की सफाई भी नहीं हो पाती। इतना ही नहीं शहर के बाहरी इलाके में काफी दूर तक नाला ही नहीं बना है। पूर्व में इस नाले का गंदा पानी खाली प्लाट में जाता था, लेकिन अब गंदा पानी सड़क पर बहता है। इसके कारण सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। बीते दिनों दो दिन हुई बारिश से सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे दिख रहे हैं।
नाला निर्माण के लिए रखा था प्रस्ताव
बागपत रोड पर नाला निर्माण के लिए नगर निगम की अवस्थापना निधि में प्रस्ताव रखा गया था। यह पास भी हो गया था। तत्कालीन नगरायुक्त मनोज चौहान ने चीफ इंजीनियर के साथ निरीक्षण कर बरसात से पहले नाला निर्माण शुरू कराने का निर्णय भी लिया था। लेकिन नाला निर्माण शुरू नहीं हुआ। जबकि नाला निर्माण न होने के कारण दो करोड़ रुपये से बनी सड़क टूट रही है।
रोहटा रोड को भी खा गया था अधूरा नाला
रोहटा रोड की हालत भी पहले बागपत रोड जैसी ही थी। नाले का पानी सड़क पर भरने से रोहटा रोड टूट गई थी। सड़क को आरसीसी कराने के लिए यहां के लोगों को आंदोलन करना पड़ा था। दो साल तक जनता को टूटी सड़क से गुजरना पड़ा था। हालांकि अब सरकार रोहटा रोड का निर्माण करा रही है।
वर्जन=====
जब तक नाला निर्माण नहीं होता है। तब तक डैंस की सड़क का चलना संभव नहीं है। तीन-चार साल में दो करोड़ रुपये की सड़क टूट जाती है। एमडीए ने बागपत रोड बनाई थी। वह टूट चुकी है। अब सड़क बनाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के पास आई है। सड़क से पहले नाला बनना चाहिए। -प्रताप सिंह, अधिशासी अभियंता पीडब्लूडी।