बागपत के ढोढना गांव के जंगल में मां की लाश के पास ही दो दिन तक मौत से लड़कर लौटी डेढ़ साल की मासूम को नई जिंदगी मिल गई। डॉक्टरों ने नया नाम दिया है गुड़िया। महिला के शव की शनाख्त नहीं हुई तो पुलिस ने महिला के शव को मिट्टी में दबवा दिया। गंभीर घायल मासूम का इलाज चल रहा है। मां तो बिछड़ गई, लेकिन फिलहाल उसका परिवार डॉक्टर और यहां के पुलिसकर्मी बन गए हैं। किसी ने कपड़े दिए, कोई खिलौने लेकर आया तो किसी ने इलाज का खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।
बड़ौत कोतवाली क्षेत्र के गांव ढोढना के जंगल में शुक्रवार को महिला की लाश मिली। शव से कुछ ही दूरी पर डेढ़ साल की मासूम भी गंभीर हालत में पड़ी हुई थी। पुलिस ने मासूम को आस्था नर्सिंग होम में भर्ती कराया। करीब 48 घंटे तक बेहोशी की हालत में मां की लाश के पास ही मासूम जंगल में पड़ी रही। मां की हत्या के राज से पर्दा नहीं उठा है, लेकिन नर्सिंग होम में मासूम को होश आ चुका है। यहां मदद के लिए बढ़ रहे हाथ से रोज उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। मासूम को पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों ने नया नाम दिया है गुड़िया। महिला पुलिसकर्मी रेखा नागर रोज सुबह 10 से रात के नौ बजे तक मासूम की देखरेख में जुटी है। वह कहती है कि हालत में काफी सुधार है और वह धीरे-धीरे मिलनसार हो रही है।
बच्ची की दवा का खर्च उठाया है बड़ौत कोतवाली प्रभारी आरके सिंह ने, जबकि जांच और इलाज के खर्च को खुद डॉ. अनिल जैन कर रहे हैं। डॉ. जैन बताते हैं कि सिर में चोट थी, अब काफी सुधार हो गया है। नर्सिंग होम का कर्मचारी निरंजन कपड़े लेकर आया है, जबकि रात में यहां दरोगा भोला सिंह की ड्यूटी रहती है।
वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों के तीमारदार भी गुड़िया का हाल जानने के लिए पहुंचते हैं। इंस्पेक्टर आरके सिंह कहते हैं कि महिला की शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मासूम के परिवार का पता लगाया जा सके। आस्था अस्पताल में गुड़िया का नया परिवार पुलिसकर्मी और डॉक्टर ही हैं। दिनभर पर रेखा नागर उसकी देखरेख में जुटी रहती है।
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