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बेबसी: एक तरफ जिंदगी की तलाश और दूसरी तरफ मौत का सामना, कुछ ऐसा है किसानों का हाल

Wed, 13 May 2020 12:45 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

  • यमुना पार खेती करने वाले किसान दांव पर लगा रहे जिंदगी
  • यमुना नदी में डूब गए थे छह राजमिस्त्री
  • चार की जान बची, एक लाश मिली और एक की तलाश जारी
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यमुना में लापता हुए युवक को तलाश करते गोताखोर और यमुना नदी से भूसा लाते किसान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागपत जनपद के बदरखा में यमुना नदी में डूबे राजमिस्त्री की दूसरे दिन भी तलाश की गई। एनडीआरएफ की टीम जुटी रही। हालात देखिए, जहां छह लोग यमुना में डूब गए, चार की जान बची, एक लाश मिली और एक डूबे युवक की तलाश चल रही है, उसी जगह क्षेत्र के किसान अपनी जिंदगी दांव पर लगाने को मजबूर हो गए हैं।  

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छपरौली और बदरखा गांव के किसानों ने नदी के दूसरी तरफ गेहूं की फसल बोई थी। थ्रेसिंग करा ली, अब घर तक भूसा वह अनाज लाए तो कैसे। ऊपर से हादसा भी हो गया। यमुना में मौत का सामना करने के लिए तैयार किया गया जुगाड़। ट्रैक्टर के पहिये की छह बड़ी ट्यूब पर लकड़ी के फट्टे और बांस रखे गए। इन पर रखी गई भूसे की 22 गठरी। छपरौली के किसान शहजाद का कहना है कि इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था। डर तो लगता है, लेकिन वह कर भी क्या सकते हैं। 
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उधर, खेकड़ा में गांव सुभानपुर स्थित यमुना नदी में डूबे श्रमिक शकील का अभी तक सुराग नहीं मिल पाया है। गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हैं। 

वहीं मंगलवार को उसका भाई इकबाल परिजनों संग कोतवाली पहुंचा और एसएसआई मुनेश पाल पंवार से शकील को बरामद कराने की गुहार लगाई।

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