पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी
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बिनौली ब्लॉक के जिवाना गुलियान गांव निवासी सतेंद्र सोलंकी को साल 1993 में जनता दल ने बरनावा से टिकट दिया। नामांकन के बाद मतदान से कुछ दिन पहले ही जनता दल ने उनसे समर्थन वापस लेकर निर्दलीय सुधीर राठी को समर्थन दे दिया। सोलंकी जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा के त्रिपाल धामा के सामने वह करीब 187 वोट से हार गए। इस तरह वह पहली बार विधायक बनते-बनते रह गए थे। सोलंकी को साल 2007 में बरनावा सीट से रालोद ने टिकट दिया। यहां से पहली बार चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे। नए परिसीमन में हुए साल 2012 के चुनाव में बरनावा सीट खत्म हो गई और बड़ौत नई सीट बनीं, लेकिन रालोद ने दोबारा से सोलंकी को टिकट नहीं दिया। सोलंकी ने साल 2017 के चुनाव में बसपा ज्वाइन कर ली। बसपा ने उन्हें मेरठ कैंट से टिकट दिया, लेकिन वह हार गए। इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के सामने वह भाजपा में शामिल हुए।