पुरातात्विक महत्व के गांव सिनौली में 3800 साल पहले भी उड़द लोगों की पसंदीदा दाल थी। साथ ही चना भी उनके भोजन का मुख्य हिस्सा था। यह साक्ष्य हाल ही में हुए उत्खनन में सामने आए हैं। विविध अनाजों के कुछ और दाने भी मिले हैं, जिनकी पहचान होना अभी बाकी है। एक पात्र में रखे अनाज के दाने काले पड़ चुके हैं। इनमें से कुछ खराब भी हो चुके हैं।
पुरातत्व विभाग के उत्खनन में यहां आठ कब्रें मिली हैं। इनमें से कब्र संख्या एक, तीन और छह में लकड़ी के तीन ताबूत मिले हैं। इन ताबूतों में सिर की तरफ फ्लास्कनुमा पात्र रखे हैं। जिनमें कुछ अनाज के दाने हैं। इन्हीं दानों में उड़द और चने मिले हैं। इन दालों के मिलने से यह साबित होता है कि 3800 साल पहले भी यहां रहने वालों की यह पसंदीदा दालें थीं।
वहीं आज भी पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रहने वाले उड़द की दाल को पसंद करते हैं। इसी तरह पैर की तरफ भी कुछ बड़े पात्र रखे हैं, जिनमें कोई तरल पदार्थ रखा गया होगा। यह रासायनिक शोध के बाद ही पता चल पाएगा कि तरल पदार्थ क्या था। ज्यादा संभावना इस बात की है कि इन पात्रों में पानी रखा गया होगा। इसके साथ ही रथ, तांबे की तलवार, ढाल, हेलमेटनुमा तांबे की वस्तु, सोने के गहने, खंजर, मनके, हड्डी से बनी कंघी, शीशा आदि सामान भी मिले हैं।