जरूरत पड़ी तो अंधे साबित हुए सीसीटीवी कैमरे
जिला अस्पताल में तीन साल पहले सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। कुछ दिन तक कैमरे चालू रहे, लेकिन इसके बाद असामाजिक तत्वों ने कैमरे तोड़ दिए। इमरजेंसी के बाहर कैमरे लगाए हैं। अस्पताल में कोई वारदात हो जाए तो कैमरें साथ नहीं देंगे। सीसीटीवी कैमरे के रूप में ताला लटका रहता है। एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे बहुत जरूरी है। उन्होंने पुलिस को निर्देश दिए कि जिला अस्पताल प्रशासन को नोटिस भेजकर सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी ले। प्रभारी सीएमएस डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि कुछ कैमरे चालू हैं। अस्पताल के बाहर कैमरे खराब हैं। उन्हें जल्दी ही ठीक करा दिया जाएगा।
चौकी पर नहीं रहती पुलिस
जिला अस्पताल में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी का निर्माण कराया। रात्रि में दो होमगार्ड की ड्यूटी लगा दी जाती है। उन्हें वारदात के बारे में जानकारी नहीं मिलती। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि चौकी पर पुलिस तैनात की जाएगी।
महिला मरीजों की जांच करते हैं वार्ड ब्वाय
जिला अस्पताल में महिला मरीज की जांच सिर्फ स्टाफ नर्स ही कर सकती है। इसके अलावा पुरुष चिकित्सक महिला मरीज का इलाज नहीं कर सकता। स्टाफ नर्स की मौजूदगी में चिकित्सक द्वारा महिला की जांच की जा सकती है। जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के 16 पद हैं, लेकिन एक ही स्टाफ नर्स कार्यरत है। दस स्टाफ नर्स ठेकेदारी पर रखी गई हैं। पांच पद अभी भी खाली हैं। रात्रि में स्टाफ नर्स ड्यूटी नहीं करती। महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया जाता है।
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