एक तरफ मौत तांडव कर रही थी और दूसरी तरफ मसीहा बनकर अनिल खड़ा था। एक या दो नहीं बल्कि पूरी पांच जिंदगियां बचाईं। अंतिम सांस तक वह मौत से लड़ता रहा, लेकिन लोगों को बचाते-बचाते खुद जिंदगी की जंग हार गया। उसके घर में मातम पसरा है। आंखों में आंसू लिए ग्रामीण उसकी हिम्मत की दाद रहे हैं।
काठा गांव का बीस साल का अनिल अब दुनिया में नहीं है। सालों तक काठा के लोगों के मन में जो दर्द उठेगा, उसमें अनिल की यादें भी रहेगी। मजदूरी पर जाने के लिए वह भी नाव में सवार हुआ। दीवाली के बाद उसके भाई मनोज की शादी है। घर में तैयारियां चल रही है, लेकिन बृहस्पतिवार को होनी को कुछ ओर ही मंजूर था। नाव यमुना नदी में धंसी तो अनिल पानी में कूद गया। वह तैरना जानता था, इसलिए मौत से लड़ बैठा। ग्रामीण बताते हैं एक या दो नहीं बल्कि पांच लोगों को वह किनारे तक लेकर पहुंचा। वह मौत से जूझता रहा। छठी बार यमुना नदी में कूदा तो फंस गया और मौत ने मसीहा को निगल लिया। परिजनों की आंखों में आंसू हैं। अनिल चार भाई हैं, अब तीन रह गए। दोनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। आंसुओं में डूबे काठा में लोग अनिल की हिम्मत की दाद दे रहे हैं।
कालूराम ने सुनाया हाल
बागपत। काठा गांव के कालूराम ने बताया उसे भी यमुना नदी पार करके हरियाणा जाना था। इसके लिए वह नाव में बैठ लिया था। नाव में अधिक भीड़ देखकर चलते समय नाव से उतर लिया था। जैसे ही नाव थोड़ा आगे पहुंची , तभी पानी में समाने लगी। कई लोग डूबने से पहले ही यमुना में कूद गए । इसमें से तीन-चार को ही तैरना आता था। इन लोगों ने कई लोगों को यमुना से निकाला। शोर शराबा होने पर ग्रामीण इकट्ठे हो गए। उन्होंने और गोताखोरों ने बड़ी मशक्कत कर यमुना में डूबे लोगों को निकाला। कई लोगों की अभी भी डूबने की आशंका बनी हुई है। उनकी तलाश में गोताखोर लगे हैं।
कई घंटे जान पर खेलते रहे गोताखोर
बागपत। शहर के गोताखोरों ने काठा गांव में पहुंचकर अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों को बचाने का काम किया। इनमें शरीफ, इरफान, सलीम, नौशाद, इमरान, बाबू वाल्मीकि ने अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचाई। करीब पांच घंटे तक गोताखोर लोगों को बचाते रहे। एनडीआरफ के आने तक गोताखोर अधिकतर लोगों को यमुना नदी से निकाल चुके थे।
डीएम और एसडीएम ने भागकर बचाई जान
हादसे के बाद पुलिस को खरीखोटी सुनाते लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
काठा गांव में यमुना नदी में नाव डूबने के बाद हुए बवाल को शांत कराने गए पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर भी भीड़ ने हमला बोल दिया। इस हमले में बागपत सीओ, कोतवाली प्रभारी समेत कई पुलिस वाले घायल हुए। लोगों का गुस्सा देखकर डीएम भवानी सिंह, सहायक पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन, एसडीएम और तहसीलदार ने तो भागकर अपनी जान बचाई। भीड़ ने महिला हेल्प लाइन (181) गाड़ी को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा कई सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस हादसे के बाद गांव काठा के ग्रामीणों पर सख्ती से पेश आई तो ग्रामीण ग्रामीण आग बबूला हो गए। उन्होंने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर दी। उस समय जो भी वहां पर पहुंचा, उन पर लाठी-डंडों से हमला कर पथराव कर दिया। पुलिस वालों को कमरे में बंद करके भी पीटा गया। इसमें बागपत सीओ दिलीप सिंह, कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार, एसडीएम अर्दली वीर सिंह, एचसीपी भगवत प्रसाद, कांस्टेबल सतीश सिंह, महिला कांस्टेबल सुमन, शव वाहन के चालक मनोज शर्मा, जिला अस्पताल के वार्ड ब्वाय राकेश कुमार घायल हो गए। लोगों के गुस्से को देकर डीएम भवानी सिंह, सहायक पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन, एसडीएम विवेक कुमार यादव, तहसीलदार राजबहादुर सिंह समेत कई अफसरों ने भागकर अपनी जान बचाई। भीड़ में शामिल लोगों ने महिला हेल्प लाइन गाड़ी में आग लगा दी। जो धू-धूकर जल उठी। इसमें सवार बाल संरक्षण अधिकारी दीपांजलि, सुगम कार्यकर्ता रश्मि सिंह, रीता समेत पांच लोगों पर हमले का प्रयास किया, लेकिन किसी तरह उनकी जान बची।
भीड़ के आगे बेबस हुआ सिस्टम
गुस्साई भीड़ के सामने प्रशासन झुकता नजर आया। जिस समय गांव में तोड़फोड़ आग आगजनी हो रही थी, पुलिस वाले दूर खड़े होकर नजारा देख रहे थे। जो अफसर ग्रामीणों के बीच थे। वे आराम से खड़े हुए थे। गाड़ी जल रही थी और दमकल विभाग की गाड़ी 150 मीटर दूर खड़ी हुई थी।
कोतवाली प्रभारी का हाल जानने अस्पताल पहुंचे आईजी
कोतवाली प्रभारी दिनेश कुमार का सिर फटा हुआ है। कोतवाल को सीएचसी में भर्ती है। आईजी ने सीएचसी पहुंच कर कोतवाल का हाल जाना।
आंसुओं में डूबा काठा, नहीं जले चूल्हे
मौके पर पहुंचे पुलिस के वरिष्ठ अफसर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
काठा गांव में मातम पसरा है। हर तरफ केवल रोने की आवाजें आ रही हैं। हर किसी की आंखों में आंसू हैं। पूरे गांव में किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले। बुजुर्ग बताते हैं गांव में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बसे काठा गांव के लिए बृहस्पतिवार का दिन दुखों का सैलाब लेकर आया। सुबह यमुना में नाव डूबी। 19 मौतों से पूरा गांव सदमे में है। सांत्वना देने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। किसी का भाई चला गया, किसी का बेटा। पोस्टमार्टम के बाद लाशें गांव में पहुंचनी शुरू हुईं तो चीख-पुकार मच गई। हर किसी की आंखों में आंसू हैं । श्मशान में चिताएं जलीं तो कब्रिस्तान में सुपुृर्द-ए-खाक किया गया। गांव में हर तरफ केे वल रोने की आवाजें आ रही हैं। चूल्हे ठंडे पड़े हैं। लोग एक दूसरे के गम में शरीक हुए। बुजुर्ग हरपाल सिंह की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह बताते हैं कि कभी ऐसी आपदा गांव ने नहीं देखी। रामकिशन कहते हैं कि ऐसा मंजर न कभी देखा और न ही सुना है। इमामुद्दीन कहते हैं कि किसी ने ऐसा सोचा भी नहीं था। सालों तक अब यह दर्द हमें सालता रहेगा।
बागपत में नहीं वेंटीलेटर, हांफ गया अस्पताल
जिला अस्पताल एक बार फिर रेफर सेंटर बन गया। किसी तरह यमुना नदी से निकालकर जिला अस्पताल तक पहुंचे पीड़ितों को चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार कर मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। चिकित्सकों ने बताया अस्पताल में वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है। इसलिए उनको रेफर किया है। बवाल में घायल हुई महिला कांस्टेबल को भी चिकित्सकों ने उच्च चिकित्सा के लिए रेफर किया। करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी जिला अस्पताल अधूरा है। इसमें न स्टाफ पूरा है और न ही सुविधा। चिकित्सक मरहम पट्टी तक ही सिमट कर रह गए हैं। इसका खुलासा बृहस्पतिवार को भी हो गया । ग्रामीण और गोताखोर बड़ी मशक्कत कर 11 महिला और पुरुषों को यमुना नदी से निकाल पाए। गंभीर हालत में उनको जिला अस्पताल लाए। इनको देखते ही स्टाफ के पसीने छूट गए। चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक उपचार किया और मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। महिला कांस्टेबल सुमन की पैर की हड्डी टूट गई । चिकित्सकों ने उसको भी रेफर कर दिया। सीएमएस डॉ. बीएलएस कुशवाहा ने कहा मरीजों की हालत गंभीर देखकर उनको रेफर किया गया है। अस्पताल में वेंटीलेटर और हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं है।
मैं भी यमुना में डूबी थी, इलाज करो
काठा गांव से एक महिला शाम के समय अस्पताल पहुंची। उसने कहा वह भी यमुना में डूबी थी। वह किसी तरह यमुना से निकली है। चिकित्सकों को उसकी बात पर यकीन नहीं हुआ। इस पर आपत्ति की। बाद में रालोद सुप्रीमो और अन्य लोगों ने उसको इलाज करने का कहा। बाद में चिकित्सकों ने उसको भी रेफर कर दिया।
किसके इशारे पर चल रही थी मौत की नाव
शव को देखकर बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि यमुना में नाव किसके इशारे पर चल रही थी। जिला पंचायत ने कहा कि पिछले साल 31 मार्च के बाद ठेका नहीं छोड़ा गया। इससे जाहिर है कि अवैध तरीके से नाव चलाई जा रही थी। हरियाणा से शराब और पशु की तस्करी भी नाव के जरिए होती है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सिस्टम की मिलीभगत से ही यह नाव चल रही थी। काठा गांव का रकबा यमुना नदी के दोनों किनारों पर है। रोज सुबह बड़ी संख्या में किसान और मजदूर यमुना के पार खेतों में जाते हैं। आवागमन का बड़ा सहारा है नाव। हादसे की गूंज लखनऊ और दिल्ली तक हुई तो वजह भी तलाशी जाने लगी है। ग्रामीणों ने सरेआम जिला पंचायत पर आरोप लगाया। भाजपा विधायक योगेश धामा की पत्नी रेणू धामा जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। ठेका किसने छोड़ा, लेकिन जिला पंचायत मुकर गई है। जिला पंचायत का कहना है कि 31 मार्च 2016 के बाद उन्होंने कोई ठेका नहीं छोड़ा। शासन ने रोक लगा दी थी। अब सवाल है कि फिर नाव किसके इशारे पर चल रही थी। ग्रामीणों ने भाजपा विधायक योगेश धामा और जिला पंचायत पर पर आरोप लगाया। आखिर किसके इशारे पर यह मौत की नाव चल रही थी। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा कि इसकी जांच कराई जा रही है।
एसडीएम करेंगे जांच, पीड़ित परिवारों को सात-सात लाख
डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने बताया एसडीएम खेकड़ा अजय उपाध्याय को मामले की जांच सौंपी गई। मृतकों के आश्रितों को सात-सात लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। उन्होंने बताया ठेका किसने छोड़ा और नाव कौन चलवा रहा था, इसकी जांच शुरू कर दी गई है। एसडीएम बागपत जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घोषणा की है, जबकि पांच-पांच लाख रुपये सर्व हित बीमा योजना से दिए जाएंगे। ग्रामीणों को प्रशासन की तरफ से पूरी मदद का भरोसा दिलाया गया है। जो लोग अस्पतालों में भर्ती है, उनके बेहतर इलाज कराया जाएगा। किसी को कोई भी परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
नाव के जरिए शराब और पशु तस्करी
काठा में चल रही नाव सुबह-शाम तो किसान और मजदूरों को लाती थी, लेकिन दिन में इससे शराब की तस्करी होती थी। ग्रामीणों ने केंद्रीय मानव संसाधन एवं नदी विकास मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह के सामने कहा कि दिनभर नाव से शराब तस्करी होती थी। इसके अलावा हरियाणा के गांवों से पशु लाए और ले जाए जाते थे। नाव चलाने वाले की मुख्य आमदनी का स्रोत तस्करी का यही खेल है। वाहनों को भी नाव के जरिए लाया और ले जाया जाता था।
मृतकों के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे सियासी दिग्गज
काठा गांव में पीड़ितों परिवारों को सांत्वना देने के लिए लखनऊ और दिल्ली की सियासत के सूरमा पहुंचे। सीएम के प्रतिनिधि गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा, पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने पीड़ितों का दर्द बांटा। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं रालोद अध्यक्ष अजित सिंह ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से बात की। घटनास्थल का हाल जाना। हादसे के बाद काठा पहुंचकर सांत्वना देने वालों का तांता लगा है। सीएम के प्रतिनिधि के तौर पर गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा ने दोपहर बाद घटनास्थल का दौरा किया। पीड़ितों का दर्द बांटा, जिला अस्पताल भी गए। पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल भी पहुंचे और लोगों को न्याय का भरोसा दिलाया। भाजपा के बड़ौत विधायक केपी मलिक, बागपत विधायक योगेश धामा, छपरौली के रालोद विधायक सहेंद्र सिंह रमाला, सपा नेता कुलदीप उज्ज्वल मौके पर पहुंचे। उधर, केंद्रीय मानव संसाधन, नदी विकास राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह और रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने भी वहां पहुंचकर लोगों की पीड़ा सुनी। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय खोखर, रालोद जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। जिला अस्पताल में पीड़ितों से बातचीत की। रालोद सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल ब्रहमपाल तोमर, सुनील रोहटा, रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक साहब सिंह, पूर्व विधायक वीरपाल राठी, मनोज तोमर, सुखबीर सिंह गठीना, देवेंद्र आर्य एडवोकेट, जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष जयवीर तोमर मौजूद रहे।
मजदूरी की डगर पर टूटी जिंदगी की डोर
रोज की तरह घर से मजदूरी करने निकले लोग, ताकि शाम को घर का चूल्हा जल जाए। परिवार की गुजर बसर इसी तरह से चल रही थी, इन्हें नहीं मालूम था कि मजदूरी की डगर पर इनकी जिंदगी की शाम ढल जाएगी। क्या मालूम था कि रोज की तरह घर ये नहीं बल्कि इनकी लाश पहुंचेगी। हादसा कई परिवारों को ऐसा दर्द देकर गया, जिसे वह कभी नहीं भुला पाएंगे। मृतक के परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। मरने वालों में अधिकांश लोग किसान और मजदूर थे। काठ के कुछ लोगों के खेत यमुना नदी के पार है, जहां इन दिनों खेतों में गन्ने की बंधाई चल रही है, कुछ किसान मजदूर वहां जा रहे थे तो कुछ हरियाणा के किसानों के खेतों में मजदूरी करने। हरियाणा के किसान मजदूरी नकद देते हैं, इसके चलते भी काफी संख्या में लोग हरियाणा मजदूरी करने जाते हैं। बृहस्पतिवार को भी ये लोग मजदूरी करने जा रहे थे।
बच्चों के सिर से उठा मां साया
काठा गांव निवासी बरसे की तो पहले ही मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद उसकी पत्नी राजो मजदूरी कर अपने पांच बच्चों का पालन पोषण कर रही थी। राजो रोज की तरह अपनी भतीजी सविता और परिवार की ही रेखा, मुकेश और काजल के साथ खेत में मजदूरी करने के लिए नाव में सवार होकर हरियाणा में जा रही थी। हादसे में राजो सहित परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई।
तीन मौतों से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
गांव काठा का इलियास अपनी बेटी मोहसिन और भतीजी शमा के साथ नाव से यमुना पार कर मजदूरी करने हरियाणा जा रहा था। इस हादसे में तीनों की मौत हो गई। परिवार दुखों का पड़ा टूट पड़ा। परिवार के तीन सदस्यों की लाश देख बदहवास हुए परिवारीजनों को संभालना मुश्किल हो रहा था। ग्रामीण उन्हें ढांढस बंधा रहे थे।
जेठानी की मौत हुई, देवरानी पहुंची अस्पताल
नाव में बैठी महिला संतरा की डूबने से मौत हो गई। उसकी देवरानी बबली को गोताखोरों ने सकुशल निकाल लिया। निकाले जाने के समय वह बेहोशी की हालत में थी। उसको पहले जिला अस्पताल लाया गया। वहां से उसको दिल्ली के लिए रेफर कर दिया।
किसान तेजपाल की गई जान
काठा गांव के तेजपाल के खेत यमुना पार हैं। वह नाव से खेत में जा रहा था। उसकी भी नाव डूबने से मौत हो गई। इसके अलावा गांव में एक किसान का नौकर सुनील भी खेत में जा रहा था। उसकी भी डूबने से मौत हो गई। जो सोनभद्र का रहने वाला है।
बिलखते लोगों पर लाठियां पड़ीं तो जल उठा काठा
अपनों की लाशों पर बिलख रहे लोगों पर सख्ती करने की पुलिस की चूक भारी पड़ गई। रोते बिलखते लोगों पर पुलिस की लाठियां पड़ीं तो लोग भड़क उठे, इसके बाद जो भी उनके सामने पड़ा, उसी पर ग्रामीणों ने अपना गुस्सा उतारा। पुलिस-प्रशासन की अदूरदर्शिता के चलते काठा जल उठा। पुलिस-प्रशासन के वाहन तोड़ दिए गए। लोगों का कहना था कि जिनके घरों के चिराग बुझे हैं, उनके साथ ही पुलिस जबरदस्ती पर उतर आई।
काठा के ग्रामीण यमुना किनारे से लाशों को लेकर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर पहुंचे। ग्रामीणों में गम और गुस्सा था। सवाल था कि हादसा क्यों और किसकी चूक से हुआ। जिन घरों के चिराग बुझ गए, उनका भविष्य क्या होगा। परिवारीजनों के आंसू रुक नहीं रहे थे, इसी बीच पुलिस-प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। लाशों को जबरन उठाने की तैयारी की। लाठियां फटकारनी शुरू कर दी। ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस-प्रशासन का रवैया इतना संवेदनहीन हो गया था कि जिनके परिवार के लोग मरे, उन पर ही लाठियां भांजनी शुरू कर दी। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़का। डीएम भवानी सिंह खंगारौत, एसडीएम विवेक कुमार यादव, तहसीलदार राजबहादुर सिंह ने किसी तरह यहां से भागकर जान बचाई। सीओ बागपत दिलीप सिंह चोटिल हुए और इंस्पेक्टर बागपत दिनेश कुमार सिंह के सिर पर भी पत्थर लग जाने से वह घायल हो गए। हाईवे पर महिला हेल्पलाइन की गाड़ी जल रही थी और पत्थर ही पत्थर फैले थे। इस स्थिति को संभालने में गांव के कुछ समझदार लोग सामने आए। कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार और आईजी रामकुमार ने लोगों को समझाया। इसके बाद लाशों को उठाने दिया।
देर से मौके पर पहुंचे आला अफसर
हादसा सुबह करीब पौने सात बजे हुआ। लेकिन सिस्टम ने इसकी भयावहता समझने में चूक कर दी। खेकड़ा तहसीलदार सबसे पहले पहुंचे। हादसे के करीब तीन घंटे बाद डीएम और अन्य अधिकारी पहुंचे। एनडीआरएफ की टीम तो आगजनी के बाद पहुंची। इस बात को लेकर भी लोगों के बीच नाराजगी पनप रही थी।
मृतकों की सूची
हादसे के बाद नाव निकालते लोग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
1. इलियास (55) पुत्र शेरदीन
2. रामपाल (52) पुत्र हरनारायण
3. मनीष (42) पुत्र राम पाल
4. तेजपाल (45) पुत्र दरियाव सिंह
5. अनिल (20) बालेश्वर
6. श्यामवीर (32) जोगेंद्र सिंह
7. सुनील (किसान का नौकर)
8. नजीरन (55) पत्नी मंगते
9. रज्जो (42) पत्नी बरसे
10. जुबैदा (55) पत्नी अल्लाह बंदा
11. संतरा (53) पत्नी ओमवीर
12. मोनी (17) पुत्री श्रीभगवान
13. रेखा (35) सुमेंद्र सिंह
14. सविता (19) रतन सिंह
15. रामबीरी (28) जसवंत
16. सोहनवीरी (55) बालीराम
17. काजल (16) पुत्र सोहनवीर
18. शमां (20) पुत्री मौसम
19. मोहसिना (20) पुत्री इलियास
नोट: मृतक सभी काठा गांव के है।
यमुना से निकाले लोग
1. सुमन (45) पत्नी दीपक
2. खातून (48) पत्नी शमशाद
3. फूलमती (40) पत्नी रोशन लाल
4. मंजू (35) पत्नी बिंदर
5. कमला (45) रामपाल
6. शिमला (40) पत्नी राजवीर
7. मीरा (35) श्री भगवान
8. बबली (42) पत्नी वीर सैन
9. संयोगिता (40) पत्नी रामबीर
10. नीरज (25) पुत्र मनोज
11. ममता (40) पत्नी नरेंद्र
नाव चलवाने के मामले की होगी जांच: सत्यपाल सिंह
घटनास्थल पर पहुंचे बागपत सांसद सत्यपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार हादसे को लेकर गंभीर है। ग्रामीणों ने जो शिकायतें की हैं, उनकी जांच कराई जा रही है। सख्त कार्रवाई होगी। अवैध खनन की शिकायतें मिली हैं, इसके अलावा नाव में इतने लोग क्यों बैठाए गए। यह मामला कब से चल रहा था, इसकी जांच होगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि निष्पक्ष जांच करें और सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जांच में जुटी है। सही और निष्पक्ष जांच होगी।
अवैध खनन हादसे की वजह: अजित सिंह
बागपत। रालोद सुप्रीमों एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह ने कहा कि अवैध रेत खनन हादसे की बड़ी वजह है। मृतक आश्रितों को 15-15 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार ने मुआवजे की जो घोषणा की है, वह बहुत कम है। यमुना में अवैध रेत खनन व हरियाणा से शराब की अवैध तस्करी करने वालों के खिलाफ जांच होनी चाहिए। उन्होंने इस हादसे के बाद मृतकों के बिलखते हुए परिजनों और ग्रामीणों पर लाठियां बरसाने की निंदा की। रालोद कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने यमुना घाट पर दो मिनट का मौन रखकर मृतकों की आत्म की शांति के लिए प्रार्थना की।
दोषी नहीं बख्शे जाएंगे, निष्पक्ष होगी जांच: सुरेश राणा
बागपत। सीएम के प्रतिनिधि गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा ने कहा कि नाव में क्षमता से अधिक लोगों और खाद के बोरे भर दिए जाने के कारण यह हादसा हुआ है। सरकार ने पीड़ितों के साथ हैं। निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हादसे की सीएम ने कई बार जानकारी ली है। घायलों को दिल्ली, मेरठ और अन्य निजी अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है। केन्द्र व प्रदेश सरकार से हर संभव मदद दिलाएं जाने का प्रयास को लेकर लगातार वार्ता चल रही है। उन्होंने कहा कि खनन के अलावा इस मामले में जो भी दोषी होगा बख्शा नहीं जाएगी।
सलाखों के पीछे भेजे जाएंगे दोषी: बघेल
बागपत। जिले के प्रभारी एवं पशुधन मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि जांच शुरू करा दी गई है। सरकार पीड़ितों के साथ है। जो शिकायतें मिली है, उसके आधार पर निष्पक्ष काअर्रवाई होगी। काठा में उन्होंने कहा कि वह आगरा थे, जैसे ही हादसे की जानकारी मिली वह बागपत के लिए रवाना हो गए। हादसा बेहद दुखद है। पीड़ित परिवार का साथ दिया जाएगा। किसी भी कीमत पर आरोपी नहीं बख्शे जाएंगे। वह राहत कार्य का जायजा ले रहे हैं।
इन्होंने कहा
बागपत विधायक योगेश धामा ने कहा कि जांच शुरू करा दी गई है। जिसकी भी गलती है, उसे सजा जरूर मिलेगी।
बड़ौत विधायक केपी मलिक ने कहा कि हादसा बेहद भयावह है। सरकार से राहत दिलाई जाएगी। कोई नहीं बच जाएगा।
छपरौली के रालोद विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने कहा कि सिस्टम की चूक से हादसा हुआ। सरकार जांच कराएं। खनन के गड्ढ़ें में नाव धंसी है, इसकी जांच होनी चाहिए।