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बागपत: उत्खनन में मिले आठ कंकालों में एक महिला का, अब डीएनए परीक्षण पर टिकी उम्मीदें

Sun, 17 Jun 2018 12:39 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, विजय नारायण सिंह, मेरठ
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सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला
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सिनौली में हुए उत्खनन में कुल आठ मानव कंकाल मिले हैं। इनमें से एक कंकाल महिला का है। दो कंकाल ताबूतों में हैं। जिनका परीक्षण होना अभी बाकी है। कुछ कंकालों से प्रोटीन के नमूने लिए गए हैं, लेकिन इनमें मिलने वाले डीएनए की शुद्धता पर संशय है। इसके पहले 2005 में भी यहीं मिले कंकालों के बोन मैरो एंथ्रोपोलोजी विभाग के कोलकाता कार्यालय को भेजे गए थे, लेकिन वहां से आज तक कोई भी रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वे को नहीं दी गई है। ऐसे में अब ताबूतों में बंद कंकालों के डीएनए परीक्षण पर ही उम्मीदें टिकी हैं। 

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किस हिस्से से मिलता है डीएनए
डीएनए सैंपल के लिए हड्डियों से बोन मैरो निकाला जाता है। इसमें मिलने वाली श्वेत रक्त कणिआओं से डीएनए को अलग किया जाता है। वैसे तो डीएनए मनुष्य के शरीर के हर हिस्से में मिल जाता है, लेकिन किसी कंकाल से सैंपल लेने के लिए विशेषकर कर पैर की निचली हड्डी टिबियो-फिबुला, कूल्हे की हड्डी और कंधों की हड्डियों में डीएनए प्रचुरता में मिलता है। 

डीएनए मिलने पर संशय
कंकाल उत्खनन के दौरान करीब तीन फुट नीचे मिले हैं। यह जमीन वर्षों से खेती के लिए इस्तेमाल की जाती रही है। ऐसे में संभावना है कि खेती के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली खाद आदि के रसायनों से डीएनए प्रदूषित हो चुका होगा। एएसआई के अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ताबूतों में रखे कंकालों का परीक्षण है। अब ऐसी तकनीक की तलाश की जा रही है, जिसके जरिए उसकी स्कैनिंग की जा सके। ताकि उसमें रखे गए शव या कंकाल का परीक्षण किया जा सके। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि लकड़ी के ताबूत करीब 4000 सालों में सड़-गल कर पूरी तरह मिट्टी बन चुके हैं। इनको खोलने की किसी भी तरह की कोशिश से मिट्टूी भरभराकर गिर जाएगी। ऐसे में एएसआई के लिए ताबूत को भी सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
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डीएनए से पता लग जाता है पूरा इतिहास

सिनौली उत्खनन - फोटो : अमर उजाला
- जिसका कंकाल है वह पृथ्वी पर रहने वाले किस समूह से संबंध रखता था।
- हजारों सालों के विकास क्रम में उसके पूर्वज कौन थे। 
- व्यक्ति शाकाहारी था या मांसाहारी या दोनों 
- मरने वाले व्यक्ति की मौत का कारण क्या था।
- उसके पूवर्जों से लेकर उस तक उसके जीन्स मे किस तरह के बदलाव हुए
- बदलावों से पता लग जाता है कि उसने मौसम के विपरीत हालातों में अपने को किस तरह जीवित रखा।

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