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राजनीति में सतपाल मलिक के 52 साल, खूब आए 'उतार-चढ़ाव', पढ़ें एक क्लिक में पूरा इतिहास

Thu, 23 Aug 2018 07:48 PM IST
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
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जम्मू के राज्यपाल सतपाल मलिक - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में छात्र जीवन से राजनीति की शुरूआत करने वाले सतपाल मलिक पिछले 52 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। भारतीय क्रांति दल, लोकदल, जनमोर्चा, जनता दल, कांग्रेस के बाद वह 2004 में लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए और बागपत सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। बागपत से विधायक, अलीगढ़ से सांसद के अलावा राज्यसभा सदस्य और केंद्र में मंत्री रहे। बोफोर्स घोटाले के बाद राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर कांग्रेस छोड़ दी थी। 

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बागपत के हिसावदा गांव निवासी सतपाल मलिक ने मेरठ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान 1965 में छात्र राजनीति में प्रवेश किया। 1966-67 में मलिक मेरठ कॉलेज के पहले छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने भारतीय क्रांति दल का गठन किया। 1974 के विधानसभा चुनाव में बीकेडी के टिकट पर बागपत सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे। 1975 में लोकदल के गठन के बाद उन्हें अखिल भारतीय महामंत्री नियुक्त किया गया। 1980 में लोकदल के प्रतिनिधि के रूप में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। इस बीच उनकी लोकदल के नेताओं से खटपट बढ़ गई, जिसके बाद 1984 में मलिक ने कांग्रेस की सदस्यता ली। 1986 में कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यसभा भेजे गए और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नियुक्त किए गए थे। 1987 में बोफोर्स घोटोले से दुखी होकर राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया और जनमोर्चा में शामिल हो गए। 1988 में जनता दल में शामिल हुए और 1991 तक जनता दल के प्रवक्ता और सचिव रहे। 1989 में जनता दल के टिकट पर अलीगढ़ से सांसद चुने गए। 

मलिक 2004 में भाजपा में शामिल हुए और बागपत लोकसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2005-06 में यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष बनाए गए। 2009 में भाजपा किसान मोर्चा के अखिल भारतीय प्रभारी बनाए गए। 2014 में भाजपा के उपाध्यक्ष रहे और चुनावी घोषणापत्र की उपसमिति में कृषि विषयक मुद्दों के अध्यक्ष रहे। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका रही। चार अक्तूबर 2017 को बिहार का राज्यपाल बनाया गया और अब उन्हें जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई है।

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कब क्या रहे सतपाल मलिक

कब क्या रहे सतपाल मलिक
वर्ष     जिम्मेदारी 
1974-77    विधायक, बागपत 
1980-84     राज्यसभा सांसद 
1986-89    राज्यसभा सांसद 
1989-91     सांसद, अलीगढ़ 
1990    केंद्रीय राज्य मंत्री 
2017    राज्यपाल, बिहार 
2018    राज्यपाल, जम्मू कश्मीर 

गांव में हवेली, भाई और भतीजे 
मलिक की पुश्तैनी हवेली हिसावदा गांव में अब भी मौजूद है। उनके चचेरे भाई ज्ञानेंद्र मलिक, अमरीश, सोबीर मलिक, नरेंद्र मलिक और वीरेंद्र मलिक गांव में रहते हैं। भतीजे अमित मलिक ने बताया कि उनका घर पर आना जाना लगा रहता है। हिसावदा से उन्हें बेहद लगाव है।

किसान और सामाजिक आंदोलन में भूमिका 
1966-67 तक मेरठ के छात्र आंदोलन में सक्रिय रहे। 1968-69 तक अंग्रेजी हटाओ आंदोलन किया। 1968 में बुल्गारिया में आयोजित विश्व युवा महोत्सव में शामिल हुए। 1974-75 तक जेपी आंदोलन में शामिल हुए। 1990 में अलीगढ़ के दंगा प्रभावित लोगों को अपना पूरे साल का वेतन दिया। बड़ौत को तहसील बनवाने के लिए आंदोलन और साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा और पीड़ितों की सहायता की।   

भाषण शैली ने दिलाई पहचान, लोग हैं मुरीद 
किसान आंदोलनों से जुड़े रहे सत्यपाल मलिक की सबसे बड़ी पहचान उनकी भाषण शैली है। मेरठ कॉलेज से उनके भाषण देने की कला के चलते ही युवाओं ने उन्हों हाथों हाथ लिया। चौ. चरण सिंह भी उनकी भाषण कला के कायल थे। भाजपा में रहते हुए उन्हें किसान प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई।
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चौटाला सीएम बनाए तो दे दिया था त्यागपत्र 
वाक्या साल 1990 का है। हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया। उनकी बात नहीं सुनी गई तो केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा दे दिया था।   

किसान परिवार में जन्मे और मां ने पाला 
हिसावदा गांव के किसान बुध सिंह के घर 24 जुलाई 1946 को सतपाल मलिक का जन्म हुआ। मलिक के बचपन में ही पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन पोषण उनकी माता जगनी देवी ने किया था। उनके जीवन पर मां की छाप रही। 

जानिए, मलिक के परिवार को 
सतपाल मलिक की पत्नी इकबाल मलिक पर्यावरणविद् हैं। उनका बेटा देव कबीर ग्राफिक डिजाइनर और पुत्रवधू निविदा चंद्रा हैं। 1980 से ही मलिक का परिवार दिल्ली में रहता है।

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