कब क्या रहे सतपाल मलिक
वर्ष जिम्मेदारी
1974-77 विधायक, बागपत
1980-84 राज्यसभा सांसद
1986-89 राज्यसभा सांसद
1989-91 सांसद, अलीगढ़
1990 केंद्रीय राज्य मंत्री
2017 राज्यपाल, बिहार
2018 राज्यपाल, जम्मू कश्मीर
गांव में हवेली, भाई और भतीजे
मलिक की पुश्तैनी हवेली हिसावदा गांव में अब भी मौजूद है। उनके चचेरे भाई ज्ञानेंद्र मलिक, अमरीश, सोबीर मलिक, नरेंद्र मलिक और वीरेंद्र मलिक गांव में रहते हैं। भतीजे अमित मलिक ने बताया कि उनका घर पर आना जाना लगा रहता है। हिसावदा से उन्हें बेहद लगाव है।
किसान और सामाजिक आंदोलन में भूमिका
1966-67 तक मेरठ के छात्र आंदोलन में सक्रिय रहे। 1968-69 तक अंग्रेजी हटाओ आंदोलन किया। 1968 में बुल्गारिया में आयोजित विश्व युवा महोत्सव में शामिल हुए। 1974-75 तक जेपी आंदोलन में शामिल हुए। 1990 में अलीगढ़ के दंगा प्रभावित लोगों को अपना पूरे साल का वेतन दिया। बड़ौत को तहसील बनवाने के लिए आंदोलन और साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा और पीड़ितों की सहायता की।
भाषण शैली ने दिलाई पहचान, लोग हैं मुरीद
किसान आंदोलनों से जुड़े रहे सत्यपाल मलिक की सबसे बड़ी पहचान उनकी भाषण शैली है। मेरठ कॉलेज से उनके भाषण देने की कला के चलते ही युवाओं ने उन्हों हाथों हाथ लिया। चौ. चरण सिंह भी उनकी भाषण कला के कायल थे। भाजपा में रहते हुए उन्हें किसान प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई।
चौटाला सीएम बनाए तो दे दिया था त्यागपत्र
वाक्या साल 1990 का है। हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया। उनकी बात नहीं सुनी गई तो केंद्रीय मंत्री परिषद से इस्तीफा दे दिया था।
किसान परिवार में जन्मे और मां ने पाला
हिसावदा गांव के किसान बुध सिंह के घर 24 जुलाई 1946 को सतपाल मलिक का जन्म हुआ। मलिक के बचपन में ही पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन पोषण उनकी माता जगनी देवी ने किया था। उनके जीवन पर मां की छाप रही।
जानिए, मलिक के परिवार को
सतपाल मलिक की पत्नी इकबाल मलिक पर्यावरणविद् हैं। उनका बेटा देव कबीर ग्राफिक डिजाइनर और पुत्रवधू निविदा चंद्रा हैं। 1980 से ही मलिक का परिवार दिल्ली में रहता है।
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