इंदिरा आवास योजना के तहत मिले थे पट्टे
ग्रामीणों जितेंद्र, ओमपाल और मुकेश समेत अन्य लोगों का कहना है कि करीब 40 वर्ष पहले उनके परिवारों को इंदिरा आवास योजना के तहत पट्टे आवंटित किए गए थे।
उनका आरोप है कि उस समय परिवार के सदस्य कम पढ़े-लिखे थे, जिसके कारण आवंटन से संबंधित अभिलेखों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं कराया जा सका। इसके बाद परिवारों ने वहां मकान बनाकर स्थायी रूप से निवास शुरू कर दिया।
तालाब की जमीन बताकर जारी किए नोटिस
ग्रामीणों का आरोप है कि अब राजस्व विभाग उक्त भूमि को तालाब की जमीन बताते हुए उसे अतिक्रमण की श्रेणी में मान रहा है। इसी आधार पर मकान खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से रहने के बावजूद अचानक की जा रही इस कार्रवाई से उनके परिवारों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
डीएम ने मांगी रिपोर्ट
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अस्मिता लाल को ज्ञापन सौंपकर नोटिस निरस्त करने और परिवारों को राहत देने की मांग की। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।